Chola Dynasty History in Hindi: UPPSC और प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए सम्पूर्ण नोट्स

इतिहास विशेष | प्रतियोगी परीक्षा तैयारी

Chola Dynasty History in Hindi भारतीय इतिहास का एक महत्वपूर्ण विषय है, जो UPPSC, UPSC, SSC, TGT, PGT और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं में बार‑बार पूछा जाता है। दक्षिण भारत के शक्तिशाली चोल साम्राज्य ने प्रशासन, समुद्री शक्ति, मंदिर स्थापत्य, व्यापार और संस्कृति के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान दिया। इस लेख में चोल साम्राज्य का पूरा इतिहास सरल भाषा में परीक्षा की दृष्टि से समझाया गया है।

चोल साम्राज्य का परिचय

चोल दक्षिण भारत का एक प्रसिद्ध राजवंश था, जिसने मुख्य रूप से वर्तमान तमिलनाडु क्षेत्र में शासन किया। चोलों का उल्लेख संगम साहित्य, अशोक के अभिलेखों और विदेशी यात्रियों के विवरणों में मिलता है। यह राजवंश अपनी शक्तिशाली नौसेना, मंदिर स्थापत्य और व्यवस्थित प्रशासन के लिए प्रसिद्ध था।

चोल साम्राज्य को दक्षिण भारत की सबसे शक्तिशाली समुद्री शक्ति माना जाता है।

चोल साम्राज्य की प्रारम्भिक राजधानी उरैयूर थी। बाद में तंजावुर और गंगैकोंड चोलपुरम को राजधानी बनाया गया। चोल शासक मुख्य रूप से शैव धर्म के अनुयायी थे, लेकिन उन्होंने अन्य धर्मों को भी संरक्षण दिया।

चोलों का प्रारम्भिक इतिहास

चोलों का उल्लेख प्राचीन संगम साहित्य में मिलता है। प्रारम्भिक चोल शासकों में करिकाल चोल सबसे प्रसिद्ध माने जाते हैं। उन्होंने कावेरी नदी क्षेत्र में सिंचाई व्यवस्था को मजबूत किया और कृषि विकास पर विशेष ध्यान दिया।

कुछ समय बाद चोल शक्ति कमजोर हो गई थी, लेकिन 9वीं शताब्दी में विजयालय चोल ने पुनः चोल साम्राज्य का उत्थान किया।

विजयालय चोल

विजयालय चोल को चोल साम्राज्य का वास्तविक संस्थापक माना जाता है। उन्होंने पल्लवों की कमजोरी का लाभ उठाकर तंजावुर पर कब्जा कर लिया और उसे अपनी राजधानी बनाया।

प्रतियोगी परीक्षाओं में अक्सर पूछा जाता है कि चोल साम्राज्य का पुनर्स्थापक कौन था। इसका उत्तर विजयालय चोल है।

चोल साम्राज्य के प्रमुख शासक और उनका समयकाल

UPPSC और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं में चोल शासकों के समयकाल और उनके महत्वपूर्ण कार्यों से जुड़े प्रश्न बार‑बार पूछे जाते हैं। इसलिए प्रमुख शासकों को क्रम से याद रखना जरूरी है।

  • करिकाल चोल — लगभग दूसरी शताब्दी ईस्वी | कावेरी नदी पर सिंचाई व्यवस्था विकसित की, बांध बनवाए।
  • विजयालय चोल — 850 ई. – 871 ई. | चोल साम्राज्य का पुनर्स्थापन, तंजावुर पर कब्जा।
  • आदित्य प्रथम — 871 ई. – 907 ई. | पल्लव शक्ति का अंत, राज्य विस्तार।
  • परांतक प्रथम — 907 ई. – 955 ई. | पांड्य क्षेत्र पर विजय, प्रशासन को मजबूत किया।
  • सुंदर चोल — 957 ई. – 970 ई. | चोल सत्ता को स्थिर बनाया।
  • उत्तम चोल — 970 ई. – 985 ई. | प्रशासनिक सुधार और मंदिर संरक्षण।
  • राजराजा चोल प्रथम — 985 ई. – 1014 ई. | बृहदेश्वर मंदिर निर्माण, श्रीलंका विजय, नौसेना को मजबूत किया।
  • राजेंद्र चोल प्रथम — 1014 ई. – 1044 ई. | गंगा अभियान, गंगैकोंड चोलपुरम की स्थापना, दक्षिण‑पूर्व एशिया तक समुद्री अभियान।
  • राजाधिराज प्रथम — 1044 ई. – 1052 ई. | चालुक्यों के विरुद्ध युद्ध।
  • वीरराजेंद्र चोल — 1063 ई. – 1070 ई. | साम्राज्य को स्थिर रखने का प्रयास।
  • कुलोत्तुंग प्रथम — 1070 ई. – 1122 ई. | प्रशासनिक सुधार, व्यापार को बढ़ावा।
राजराजा चोल प्रथम और राजेंद्र चोल प्रथम को चोल साम्राज्य का स्वर्ण युग स्थापित करने वाला शासक माना जाता है।

राजराजा चोल प्रथम (985 ई. – 1014 ई.)

राजराजा चोल प्रथम चोल साम्राज्य के सबसे महान शासकों में गिने जाते हैं। उनके शासनकाल में चोल शक्ति अपने चरम पर पहुँची। उन्होंने पांड्य, चेर और श्रीलंका के कई क्षेत्रों पर विजय प्राप्त की।

तंजावुर का प्रसिद्ध बृहदेश्वर मंदिर राजराजा चोल प्रथम द्वारा बनवाया गया था।

राजराजा प्रथम ने प्रशासनिक सुधार भी किए। उन्होंने राज्य को मंडलम, वलनाडु, नाडु और ग्राम जैसी प्रशासनिक इकाइयों में विभाजित किया।

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राजेंद्र चोल प्रथम (1014 ई. – 1044 ई.)

राजेंद्र चोल प्रथम, राजराजा चोल प्रथम के पुत्र थे। उन्होंने चोल साम्राज्य का और अधिक विस्तार किया। वे भारतीय इतिहास के सबसे शक्तिशाली समुद्री शासकों में गिने जाते हैं।

राजेंद्र चोल प्रथम ने उत्तर भारत तक अभियान चलाया और गंगा नदी तक विजय प्राप्त की। इसी कारण उन्होंने “गंगैकोंड” की उपाधि धारण की।

उन्होंने नई राजधानी गंगैकोंड चोलपुरम बसाई, जो बाद में चोल साम्राज्य का महत्वपूर्ण राजनीतिक और सांस्कृतिक केंद्र बना।

चोल प्रशासन व्यवस्था

चोल प्रशासन भारतीय इतिहास की सबसे व्यवस्थित प्रशासनिक व्यवस्थाओं में गिना जाता है। प्रशासन की मुख्य इकाइयाँ थीं:

  • मंडलम
  • वलनाडु
  • नाडु
  • ग्राम

चोल शासन की सबसे महत्वपूर्ण विशेषता ग्राम प्रशासन था। ग्राम सभाएँ स्थानीय प्रशासन चलाती थीं और कर संग्रह से लेकर सिंचाई व्यवस्था तक का काम संभालती थीं।

चोलों की चुनाव प्रणाली को “कुडावोलै प्रणाली” कहा जाता था।

चोल सेना और नौसेना

चोल सेना में पैदल सेना, घुड़सवार सेना, हाथी सेना और नौसेना शामिल थी। चोलों की नौसेना उस समय एशिया की सबसे शक्तिशाली नौसेनाओं में मानी जाती थी।

चोलों ने श्रीलंका, मालदीव और दक्षिण‑पूर्व एशिया तक समुद्री अभियान चलाए। प्रतियोगी परीक्षाओं में अक्सर पूछा जाता है कि दक्षिण‑पूर्व एशिया तक समुद्री अभियान चलाने वाला भारतीय राजवंश कौन था। इसका उत्तर चोल राजवंश है।

चोल अर्थव्यवस्था

चोल अर्थव्यवस्था मुख्य रूप से कृषि और व्यापार पर आधारित थी। कावेरी नदी क्षेत्र कृषि का प्रमुख केंद्र था। चोल शासकों ने सिंचाई व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए तालाब, जलाशय और बांध बनवाए।

चोलों का व्यापार चीन, अरब और दक्षिण‑पूर्व एशिया से होता था। मसाले, वस्त्र और कीमती पत्थर प्रमुख निर्यात वस्तुएँ थीं।

चोल कला और स्थापत्य

चोल काल दक्षिण भारतीय स्थापत्य कला का स्वर्ण युग माना जाता है। इस काल में द्रविड़ शैली के विशाल मंदिर बनाए गए।

तंजावुर का बृहदेश्वर मंदिर और गंगैकोंड चोलपुरम मंदिर चोल स्थापत्य के सबसे महत्वपूर्ण उदाहरण हैं।

चोल काल की कांस्य नटराज प्रतिमा विश्व प्रसिद्ध मानी जाती है।

चोल काल में धर्म और साहित्य

चोल शासक मुख्य रूप से शैव धर्म के अनुयायी थे, लेकिन उन्होंने वैष्णव, बौद्ध और जैन धर्म को भी संरक्षण दिया।

चोल काल में तमिल साहित्य का भी विकास हुआ। “कंब रामायण” और “पेरियापुराणम” इस काल की महत्वपूर्ण रचनाएँ मानी जाती हैं।

चोल साम्राज्य का पतन

12वीं शताब्दी के बाद चोल शक्ति कमजोर होने लगी। पांड्य शक्ति के उदय, आंतरिक संघर्ष और प्रशासनिक कमजोरी के कारण चोल साम्राज्य का पतन हुआ।

13वीं शताब्दी तक चोल साम्राज्य लगभग समाप्त हो गया, लेकिन कला, स्थापत्य और प्रशासन में उनका योगदान आज भी भारतीय इतिहास में महत्वपूर्ण माना जाता है।

UPPSC और प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए महत्वपूर्ण तथ्य

  • विजयालय चोल को चोल साम्राज्य का पुनर्स्थापक माना जाता है।
  • बृहदेश्वर मंदिर का निर्माण राजराजा चोल प्रथम ने कराया था।
  • राजेंद्र चोल प्रथम ने गंगा अभियान चलाया।
  • चोल स्थापत्य द्रविड़ शैली का था।
  • कुडावोलै प्रणाली चोलों की चुनाव पद्धति थी।
  • चोलों की नौसेना अत्यंत शक्तिशाली थी।
  • गंगैकोंड चोलपुरम राजेंद्र चोल प्रथम द्वारा बसाया गया था।

FAQ: Chola Dynasty History in Hindi

चोल साम्राज्य का सबसे महान शासक कौन था?

राजराजा चोल प्रथम और राजेंद्र चोल प्रथम को चोल साम्राज्य का सबसे महान शासक माना जाता है।

बृहदेश्वर मंदिर का निर्माण किसने कराया था?

तंजावुर का बृहदेश्वर मंदिर राजराजा चोल प्रथम द्वारा बनवाया गया था।

कुडावोलै प्रणाली क्या थी?

कुडावोलै प्रणाली चोलों की चुनाव व्यवस्था थी, जिसमें पात्र व्यक्तियों का चयन विशेष प्रक्रिया से किया जाता था।

UPPSC परीक्षा में चोल साम्राज्य से कौन‑से प्रश्न पूछे जाते हैं?

चोल शासक, बृहदेश्वर मंदिर, कुडावोलै प्रणाली, चोल नौसेना और गंगा अभियान से जुड़े प्रश्न अक्सर पूछे जाते हैं।

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