आज मोबाइल फोन पर ट्रेन की लाइव स्थिति देखना सामान्य सुविधा बन चुकी है, लेकिन कुछ वर्ष पहले तक भारतीय रेलवे यात्रियों के लिए यह सुविधा उपलब्ध नहीं थी। यह कहानी उस समय की है, जब 2014–2015 के आसपास यात्रियों को ट्रेन की स्थिति जानने के लिए स्टेशन पर अनाउंसमेंट और अनुमान पर निर्भर रहना पड़ता था।
इसी दौर में एक रेलवे स्टेशन पर ट्रेन के देर से आने का इंतज़ार करते हुए एक साधारण सवाल उठा— यदि कैब और राइड को रियल टाइम में ट्रैक किया जा सकता है, तो ट्रेन को क्यों नहीं। यही सवाल आगे चलकर एक तकनीकी समाधान में बदला।
स्टार्टअप Sigmoid Labs के को-फाउंडर अहमद निज़ामुद्दीन (Ahmed Nizamuddin) ने एक इंटरव्यू में बताया था कि जब वे स्टेशन पर अपनी लेट ट्रेन का इंतज़ार कर रहे थे, तभी उनके मन में यह विचार आया। उनके अनुसार, यही अनुभव आगे चलकर ऐप विकसित करने की आधारशिला बना।
अहमद निज़ामुद्दीन और उनकी टीम ने मिलकर Where Is My Train नाम का मोबाइल ऐप विकसित किया। इस ऐप की खासियत यह थी कि यह GPS या इंटरनेट पर निर्भर नहीं था, बल्कि मोबाइल नेटवर्क के सेल टावर सिग्नल के आधार पर ट्रेन की स्थिति का अनुमान लगाता था। यह तकनीक भारत जैसे देश में उपयोगी साबित हुई, जहां हर स्थान पर तेज़ इंटरनेट उपलब्ध नहीं होता।
बिना किसी बड़े विज्ञापन अभियान के यह ऐप यात्रियों के बीच लोकप्रिय होता गया। रेलवे स्टेशन, जनरल और स्लीपर कोच तथा प्लेटफॉर्म पर यात्रियों के बीच इसका नाम बातचीत का हिस्सा बनने लगा। यह ऐप उन यात्रियों के लिए सहायक बना, जिन्हें घंटों ट्रेन की स्थिति को लेकर अनिश्चितता रहती थी।
इस भारतीय इनोवेशन पर वैश्विक स्तर पर ध्यान तब गया, जब Google ने इसकी तकनीक और उपयोगिता को पहचाना। दिसंबर 2018 में Google ने Sigmoid Labs का अधिग्रहण कर लिया। हालांकि अधिग्रहण की आधिकारिक राशि सार्वजनिक नहीं की गई, लेकिन मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार यह सौदा 200 से 300 करोड़ रुपये के बीच आंका गया।
वर्तमान में यही तकनीक Google Maps में Live Train Status फीचर के रूप में उपलब्ध है, जिसका उपयोग देशभर में करोड़ों यात्री कर रहे हैं। यह कहानी आज भी इसलिए प्रासंगिक है, क्योंकि यह दिखाती है कि रोज़मर्रा की समस्या से निकला विचार किस तरह व्यापक समाधान में बदल सकता है।
