देशभर के लाखों शिक्षकों से जुड़े शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) को लेकर सरकार ने लोकसभा में स्थिति स्पष्ट की है। शिक्षा मंत्रालय की ओर से बताया गया है कि कक्षा 1 से 8 तक के शिक्षकों की नियुक्ति के लिए TET पास करना न्यूनतम आवश्यक योग्यता में शामिल है।
सरकार ने बताया कि निःशुल्क और अनिवार्य बाल शिक्षा अधिकार (RTE) अधिनियम, 2009 की धारा 23 के तहत राष्ट्रीय शिक्षक शिक्षा परिषद (NCTE) ने 23 अगस्त 2010 को अधिसूचना जारी कर शिक्षकों के लिए न्यूनतम योग्यताएं तय की थीं, जिनमें TET भी शामिल है।
शिक्षा मंत्रालय के अनुसार, माननीय सुप्रीम कोर्ट ने 1 सितंबर 2025 को दिए अपने फैसले में यह स्पष्ट किया है कि TET, RTE अधिनियम के तहत निर्धारित न्यूनतम योग्यताओं में से एक है और अधिनियम के अंतर्गत आने वाले स्कूलों में शिक्षक के रूप में नियुक्ति के लिए यह अनिवार्य है।
2011 से पहले नियुक्त किए गए सेवायत शिक्षकों के संबंध में भी अदालत ने व्यवस्था दी है। जिन शिक्षकों की सेवा अवधि निर्णय की तारीख से पांच साल से अधिक बची है, उन्हें दो साल की अवधि के भीतर TET उत्तीर्ण करने का अवसर दिया जा सकता है। वहीं, जिनकी सेवा पांच साल से कम बची है, उन्हें TET पास किए बिना भी सेवा में बने रहने की अनुमति दी गई है, लेकिन वे पदोन्नति के लिए तब तक पात्र नहीं होंगे जब तक TET पास नहीं कर लेते।
मंत्रालय ने यह भी स्पष्ट किया है कि RTE अधिनियम के प्रावधानों के अनुसार, भविष्य में शिक्षक के तौर पर सीधी भर्ती या पदोन्नति के माध्यम से नियुक्ति के इच्छुक सभी अभ्यर्थियों के लिए TET एक आवश्यक योग्यता बना रहेगा।
इस जवाब के बाद एक बार फिर TET को लेकर बहस तेज हो गई है और बड़ी संख्या में शिक्षक इस फैसले के दूरगामी असर को लेकर चर्चा कर रहे हैं।














