एआई समिट में पेश किए गए ‘ओरिअन’ रोबोट पर विवाद, भारत और चीन के दावों में टकराव

नई दिल्ली | 18 फरवरी 2026
नई दिल्ली के भारत मंडपम में India AI Impact Summit 2026 के दौरान प्रदर्शित Orion चार-पैरों वाला रोबोट
India AI Impact Summit 2026 में प्रदर्शित Orion रोबोट

नई दिल्ली में आयोजित India AI Impact Summit 2026 का आयोजन भारत मंडपम में 16 फरवरी से 20 फरवरी 2026 तक किया जा रहा है। यह पांच दिन का वैश्विक स्तर का कार्यक्रम है, जिसमें दुनिया भर से सरकारी प्रतिनिधि, टेक कंपनियों के प्रमुख, शोधकर्ता और उद्योग विशेषज्ञ भाग ले रहे हैं। इसी समिट के दौरान Galgotias University की ओर से एक चार-पैरों वाला रोबोट “Orion” पेश किया गया, जिसे यूनिवर्सिटी की टीम ने अपनी इन-हाउस इनोवेशन बताया। प्रस्तुति के बाद सोशल मीडिया पर इस प्रोजेक्ट को लेकर चर्चा और बहस तेज हो गई।

चीन के सोशल मीडिया अकाउंट China Pulse की ओर से दावा किया गया कि यह रोबोट असल में चीन की कंपनी Unitree का कमर्शियल मॉडल Unitree Go2 है, जिसकी कीमत करीब $2,800 बताई जा रही है। पोस्ट में कहा गया कि एक भारतीय यूनिवर्सिटी ने इस रोबोट को अपनी खुद की इनोवेशन के तौर पर पेश किया है।

इसके जवाब में Galgotias से जुड़े पक्ष और समर्थकों की ओर से कहा गया कि हार्डवेयर भले ही बाहर से लिया गया हो, लेकिन सॉफ्टवेयर, कंट्रोल सिस्टम, आर्किटेक्चर, लॉजिक और कस्टम कमांड्स पूरी तरह इन-हाउस विकसित किए गए हैं। उनका यह भी कहना है कि ऑपरेटिंग सिस्टम को मॉडिफाई और ऑप्टिमाइज़ किया गया है तथा सिस्टम को हिंदी में लोकलाइज़ किया गया है, ताकि भारतीय उपयोगकर्ताओं के लिए इसे उपयोगी बनाया जा सके।

प्रोफेसर के अनुसार “Orion” को Galgotias University में विकसित किया गया है।

इस बीच, सोशल मीडिया पर कुछ उपयोगकर्ताओं का तर्क है कि यदि यह प्रोजेक्ट पूरी तरह मौलिक है, तो इसके तकनीकी डॉक्यूमेंटेशन और रिसर्च से जुड़े विवरण सार्वजनिक होने चाहिए। कुछ पोस्ट में यह भी कहा गया है कि ₹350 करोड़ के R&D से जुड़े दावों का कोई ठोस प्रमाण सामने नहीं आया है।

पूरे मामले में एक तरफ चीन की ओर से इसे एक कमर्शियल रोबोट बताया जा रहा है, वहीं दूसरी तरफ भारतीय पक्ष इसे हार्डवेयर पर आधारित इन-हाउस सॉफ्टवेयर और सिस्टम इनोवेशन का उदाहरण बता रहा है। फिलहाल विवाद का केंद्र यही है कि यह प्रोजेक्ट पूरी तरह नया और मौलिक इनोवेशन है या फिर रेडीमेड प्लेटफॉर्म पर किया गया कस्टम डेवलपमेंट। विशेषज्ञों के अनुसार, स्पष्ट स्थिति सामने आने के लिए तकनीकी विवरण और पारदर्शी जानकारी का सार्वजनिक होना आवश्यक होगा।

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