बेसिक शिक्षा परिषद के अंतर्गत कार्यरत शिक्षकों के अवकाश से संबंधित स्थिति स्पष्ट हो गई है। जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी, वाराणसी की ओर से सूचना के अधिकार के तहत दी गई जानकारी में बताया गया है कि परिषदीय शिक्षकों को अध्ययन अवकाश (स्टडी लीव) की सुविधा प्रदान नहीं की जाती है।
विभागीय जानकारी के अनुसार, राज्य सरकार के अन्य वर्गों के कर्मचारियों को भले ही अध्ययन अवकाश का प्रावधान हो, लेकिन बेसिक शिक्षा परिषद में कार्यरत शिक्षक इस श्रेणी में शामिल नहीं हैं। ऐसे में यदि कोई शिक्षक अध्ययन या अन्य निजी कारणों से लंबी अवधि का अवकाश चाहता है, तो उसके लिए केवल असाधारण अवकाश (बिना वेतन) का विकल्प उपलब्ध है।
उपलब्ध जानकारी के अनुसार, असाधारण अवकाश स्वतः प्रदान नहीं किया जाता है। यह तभी संभव है जब कर्मचारी के खाते में कोई अन्य अवकाश शेष न हो और वह स्वयं आवेदन के माध्यम से असाधारण अवकाश की मांग करे। ऐसे आवेदनों पर निर्णय परिस्थितियों के आधार पर लिया जाता है।
विभागीय नियमों में यह भी स्पष्ट किया गया है कि अवकाश को कर्मचारी का स्वाभाविक अधिकार नहीं माना गया है। किसी भी प्रकार के अवकाश की स्वीकृति या अस्वीकृति सक्षम अधिकारी के विवेक पर निर्भर करती है। अधिकारी कार्यहित और सार्वजनिक हित को ध्यान में रखते हुए अवकाश स्वीकार या अस्वीकार करने का निर्णय ले सकता है।
जानकारी में यह भी उल्लेख है कि यदि कोई शिक्षक या कर्मचारी अवकाश स्वीकृत होने से पहले ही ड्यूटी से अनुपस्थित हो जाता है, तो उसके विरुद्ध विभागीय अनुशासनात्मक कार्रवाई की जा सकती है। साथ ही यह स्पष्ट किया गया है कि असाधारण अवकाश से संबंधित नियम पूरे प्रदेश में समान रूप से लागू हैं और किसी जिले के लिए अलग व्यवस्था नहीं है।
समग्र रूप से उपलब्ध आधिकारिक जानकारी से यह स्पष्ट होता है कि बेसिक शिक्षा परिषद के शिक्षकों को अध्ययन अवकाश का लाभ नहीं मिलेगा, असाधारण अवकाश केवल निर्धारित शर्तों के अंतर्गत और आवेदन के बाद ही संभव है, तथा अंतिम निर्णय संबंधित सक्षम अधिकारी द्वारा लिया जाएगा।




