भारत और अमेरिका के बीच Interim Trade Agreement के फ्रेमवर्क को लेकर सरकार ने कृषि क्षेत्र से जुड़े प्रावधानों पर स्थिति स्पष्ट की है। अधिकारियों के अनुसार, इस अंतरिम व्यवस्था का उद्देश्य द्विपक्षीय व्यापार को आगे बढ़ाना है, जबकि घरेलू स्तर पर संवेदनशील क्षेत्रों, विशेष रूप से कृषि और खाद्य सुरक्षा से जुड़े उत्पादों को इसके दायरे से बाहर रखा गया है।
वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि इस समझौते में मुख्य कृषि अनाज और संवेदनशील कृषि उत्पादों को किसी भी प्रकार की आयात-निर्यात रियायत या बाजार खोलने की बाध्यता के दायरे में नहीं लाया गया है। उन्होंने बताया कि गेहूं, कोपरा, श्यामक, कोदो, बाजरा, कांगनी, ओट्स, मैदा, रागी, अमरथ, मक्का, चावल, जौ, ज्वार, छिलका रहित अनाज तथा आटा (गेहूं, मक्का, बाजरा) जैसे उत्पादों को पूरा संरक्षण दिया गया है और इन वस्तुओं पर किसी भी प्रकार की आयात रियायत लागू नहीं होगी।
पीयूष गोयल ने यह भी कहा कि यह फ्रेमवर्क एक अंतरिम व्यवस्था है और इसका उद्देश्य भविष्य में होने वाले व्यापक Bilateral Trade Agreement के लिए आधार तैयार करना है। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत की खाद्य सुरक्षा और किसानों के हितों से जुड़े विषयों पर किसी भी प्रकार का समझौता नहीं किया गया है और आगे की बातचीत में भी इन बिंदुओं को प्राथमिकता दी जाएगी।
सरकार के मुताबिक, इस अंतरिम ढांचे के तहत कुछ गैर-संवेदनशील क्षेत्रों में व्यापार प्रक्रिया को सरल बनाने और तकनीकी मुद्दों को सुलझाने पर सहमति बनी है, जबकि कृषि और ग्रामीण अर्थव्यवस्था से जुड़े क्षेत्रों को सुरक्षित रखा गया है। अधिकारियों ने बताया कि आगे की वार्ताओं के बाद ही किसी अंतिम और औपचारिक समझौते पर हस्ताक्षर किए जाएंगे।
उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से जारी जानकारी के अनुसार, भारत-अमेरिका अंतरिम व्यापार समझौता कृषि और ग्रामीण अर्थव्यवस्था के संदर्भ में राज्य के किसानों के हितों को सुरक्षित रखते हुए वैल्यू-एडेड कृषि को प्रोत्साहित करने पर केंद्रित है। राज्य सरकार के मुताबिक, इस ढांचे से प्रोसेस्ड फूड और एग्री-आधारित उत्पादों के लिए निर्यात के नए अवसर सृजित हो सकते हैं, जबकि डेयरी से जुड़े उत्पादों जैसे दूध, चीज, क्रीम, बटर ऑयल, घी, पनीर, बटर मिल्क, मट्ठा और अन्य डेयरी उत्पादों के मामले में किसानों के हितों और घरेलू बाजार की सुरक्षा को प्राथमिकता दी गई है।














