22 फरवरी 2026 को #JusticeForTeachers हैशटैग X (पूर्व ट्विटर) पर कई घंटे तक नंबर-1 ट्रेंड पर बना रहा। देश के विभिन्न राज्यों से शिक्षकों द्वारा बड़ी संख्या में पोस्ट साझा की गईं, जिसके कारण यह विषय लंबे समय तक ट्रेंडिंग सूची में शीर्ष पर बना रहा। यह गतिविधि सुप्रीम कोर्ट के 1 सितंबर 2025 के फैसले से जुड़े मुद्दों को लेकर सामने आई बताई गई है।
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुसार, RTE अधिनियम 2009 से पहले नियुक्त और वर्तमान में सेवा में कार्यरत शिक्षकों के लिए TET उत्तीर्ण करना अनिवार्य किया गया है। जिन शिक्षकों की सेवा अवधि में पांच वर्ष से अधिक समय शेष है, उन्हें अगस्त 2027 तक यह परीक्षा उत्तीर्ण करनी होगी। जिनकी सेवा में पांच वर्ष से कम समय बचा है, उन्हें इस शर्त से छूट दी गई है, लेकिन उन्हें पदोन्नति का लाभ नहीं मिलेगा। यह प्रावधान गैर-अल्पसंख्यक विद्यालयों पर लागू बताया गया है।
Teachers Federation of India (STFI) सहित विभिन्न शिक्षक संगठनों ने इस विषय पर अपनी आपत्ति दर्ज कराई है और आगे की गतिविधियों की जानकारी भी साझा की है। संगठनों की ओर से बताया गया है कि आने वाले दिनों में विभिन्न स्थानों पर विरोध प्रदर्शन और ज्ञापन से जुड़े कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।
संगठनों की ओर से यह भी जानकारी दी गई है कि इस मामले में रिव्यू पिटीशन दायर की गई है और केंद्र सरकार से RTE अधिनियम की धारा 23 में संशोधन पर विचार करने का अनुरोध किया गया है। विभिन्न राज्यों में शिक्षक संगठनों द्वारा इस विषय पर बैठकों और समन्वय की प्रक्रिया जारी बताई गई है।
यह मुद्दा उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, केरल सहित कई राज्यों के शिक्षकों से जुड़ा बताया जा रहा है। सोशल मीडिया पर हुई व्यापक गतिविधि के बाद इस विषय पर सार्वजनिक स्तर पर चर्चा और तेज होने की बात कही जा रही है।














