मिशन कर्मयोगी की प्रगति की समीक्षा, विभागीय प्रशिक्षण ढांचे पर मंथन

लखनऊ | 7 जनवरी ।
लखनऊ में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में मिशन कर्मयोगी की समीक्षा बैठक
लखनऊ में आयोजित उच्च स्तरीय बैठक में मिशन कर्मयोगी की प्रगति की समीक्षा करते मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कल मंगलवार शाम आयोजित एक उच्च स्तरीय बैठक में मिशन कर्मयोगी के अंतर्गत उत्तर प्रदेश में अब तक हुई प्रगति और आगामी कार्ययोजना की समीक्षा की। बैठक में मिशन के क्रियान्वयन, प्रशिक्षण ढांचे, डिजिटल प्लेटफॉर्म की स्थिति और विभिन्न विभागों में क्षमता संवर्धन से जुड़े बिंदुओं पर विस्तार से चर्चा की गई।

बैठक के दौरान कैपेसिटी बिल्डिंग कमीशन की चेयरपर्सन एस. राधा चौहान ने मुख्यमंत्री के समक्ष उत्तर प्रदेश में मिशन कर्मयोगी के क्रियान्वयन की स्थिति को लेकर विस्तृत प्रस्तुतीकरण दिया। इसमें विभागीय प्रशिक्षण व्यवस्था, डिजिटल लर्निंग और मानव संसाधन विकास से जुड़े पहलुओं को शामिल किया गया।

मुख्यमंत्री के निर्देशानुसार UPAAM (Uttar Pradesh Academy of Administration and Management), जो उत्तर प्रदेश सरकार की एक प्रमुख प्रशिक्षण संस्था है, को राज्य के विभागों के लिए कैपेसिटी बिल्डिंग प्लान तैयार करने की नोडल संस्था के रूप में कार्य सौंपा गया है। इसके तहत विभाग-विशेष लर्निंग पैकेज विकसित किए जाएंगे, जिन्हें iGoT कर्मयोगी पोर्टल पर उपलब्ध कराया जाएगा। इसका उद्देश्य सरकारी कर्मचारियों को लक्ष्य-आधारित और निरंतर प्रशिक्षण प्रदान करना है।

बैठक में प्रस्तुत आंकड़ों के अनुसार, iGoT कर्मयोगी प्लेटफॉर्म पर उत्तर प्रदेश से 18.8 लाख से अधिक कार्मिक ऑनबोर्ड हो चुके हैं। वहीं, 10 लाख से अधिक उपयोगकर्ताओं ने कम से कम एक प्रशिक्षण पाठ्यक्रम पूर्ण किया है। इसके अलावा, प्रदेश से अब तक 72 लाख से अधिक पाठ्यक्रम पूर्ण किए जाने की जानकारी दी गई।

मुख्यमंत्री ने सभी अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए सात-दिवसीय कैपेसिटी बिल्डिंग कार्यक्रम को अनिवार्य करने तथा इसे पदोन्नति और वार्षिक गोपनीय आख्या (ACR) से जोड़ने के निर्देश दिए।

मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि UPAAM सहित प्रदेश के सभी प्रशिक्षण केंद्र समय की आवश्यकता के अनुरूप पाठ्यक्रम विकसित करें, ताकि नव-प्रशिक्षणार्थियों की कार्य-दक्षता प्रारंभिक स्तर पर ही सुदृढ़ हो सके। सभी विभागों और सरकारी संस्थानों के प्रशिक्षण पाठ्यक्रमों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और साइबर सिक्योरिटी को शामिल करने पर विशेष जोर दिया गया।

बैठक में सड़क, सिंचाई, भवन, पुल और संचार जैसे क्षेत्रों से जुड़े इंजीनियरों के लिए विशेष प्रशिक्षण पैकेज तैयार करने के निर्देश दिए गए। इसके साथ ही PWD, नगर विकास, पुलिस प्रशासन, ग्रामीण विकास और पंचायती राज जैसे फील्ड-इंटेंसिव विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों की उपस्थिति में क्षमता निर्माण को संस्थागत रूप देने पर चर्चा हुई। इसका उद्देश्य विकास परियोजनाओं की गुणवत्ता और समयबद्धता को बेहतर बनाना बताया गया।

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