नई दिल्ली: भारतीय गुड़ निर्यात में पिछले कुछ वर्षों के दौरान तेज बढ़ोतरी दर्ज की गई है। दुनिया भर में बनने वाले कुल गुड़ का 70 प्रतिशत से अधिक उत्पादन भारत में होता है। बढ़ती वैश्विक मांग, प्राकृतिक स्वीटनर की लोकप्रियता और सरकारी योजनाओं के कारण भारतीय गुड़ उद्योग किसानों, ग्रामीण रोजगार और निर्यात अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा बनता जा रहा है। केंद्र और राज्य सरकारें अब गुड़ प्रसंस्करण उद्योग को आधुनिक बनाने और अंतरराष्ट्रीय बाजार से जोड़ने पर जोर दे रही हैं।
दुनिया का सबसे बड़ा गुड़ उत्पादक है भारत
भारत को दुनिया का सबसे बड़ा गुड़ उत्पादक देश माना जाता है। वर्ष 2024-25 में देश में लगभग 444.9 मिलियन टन गन्ने के उत्पादन का अनुमान लगाया गया था।
गन्ना उत्पादन में उत्तर प्रदेश सबसे आगे रहा, जहां कुल उत्पादन में लगभग 48.5 प्रतिशत हिस्सेदारी दर्ज की गई। इसके बाद महाराष्ट्र का 24.1 प्रतिशत और कर्नाटक का 10.5 प्रतिशत योगदान रहा।
विशेषज्ञों के अनुसार, देश में कुल गन्ना उत्पादन का लगभग 20 से 30 प्रतिशत हिस्सा गुड़ निर्माण में इस्तेमाल किया जाता है। यही वजह है कि उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, बिहार, हरियाणा और कर्नाटक जैसे राज्यों में हजारों छोटे और मध्यम स्तर के गुड़ उद्योग संचालित हो रहे हैं।
भारतीय गुड़ निर्यात में रिकॉर्ड बढ़ोतरी
पिछले एक दशक में भारतीय गुड़ निर्यात में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। वर्ष 2015-16 में भारत ने लगभग 292.8 मीट्रिक टन गुड़ और संबंधित उत्पादों का निर्यात किया था, जिससे करीब 197 मिलियन अमेरिकी डॉलर की कमाई हुई थी।
वहीं वर्ष 2024-25 तक निर्यात बढ़कर लगभग 471.9 मीट्रिक टन तक पहुंच गया, जबकि निर्यात मूल्य 406.8 मिलियन अमेरिकी डॉलर दर्ज किया गया।
इस दौरान:
- निर्यात मूल्य में लगभग 106.5 प्रतिशत वृद्धि
- निर्यात मात्रा में करीब 61.2 प्रतिशत बढ़ोतरी
दर्ज की गई। यह बढ़ोतरी दर्शाती है कि वैश्विक बाजार में भारतीय गुड़ की मांग लगातार मजबूत हो रही है।
किन देशों में सबसे ज्यादा जा रहा भारतीय गुड़
वर्ष 2024-25 के दौरान भारतीय गुड़ के प्रमुख निर्यात बाजारों में:
- इंडोनेशिया
- अमेरिका
- संयुक्त अरब अमीरात (UAE)
- नाइजीरिया
- नेपाल
जैसे देश शामिल रहे। विशेषज्ञों के अनुसार, प्राकृतिक और कम रसायन वाले खाद्य उत्पादों की बढ़ती मांग भारतीय गुड़ निर्यात को और गति दे सकती है।
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2025-26 में भी जारी रही तेजी
अप्रैल-जनवरी 2025-26 के दौरान भारत का गुड़ निर्यात लगभग 450.1 मीट्रिक टन तक पहुंच गया, जिसका कुल मूल्य करीब 384.4 मिलियन अमेरिकी डॉलर रहा।
यह 2024-25 की समान अवधि की तुलना में:
- मात्रा में लगभग 16.5 प्रतिशत अधिक
- और मूल्य में करीब 15.9 प्रतिशत ज्यादा
दर्ज किया गया।
कृषि व्यापार विशेषज्ञों का कहना है कि यह वृद्धि ग्रामीण उद्योगों, किसानों, ट्रांसपोर्ट नेटवर्क और खाद्य प्रसंस्करण इकाइयों के लिए सकारात्मक संकेत मानी जा रही है।
इतिहास और परंपरा से जुड़ा है भारतीय गुड़
भारत में गुड़ निर्माण की परंपरा हजारों वर्षों पुरानी मानी जाती है। ऐतिहासिक विवरणों के अनुसार, वर्ष 647 ईस्वी में चीन का एक प्रतिनिधिमंडल गन्ना प्रसंस्करण तकनीक सीखने के लिए मगध आया था।
विशेषज्ञ मानते हैं कि “शुगर” शब्द भी संस्कृत के “शर्करा” शब्द से निकला है, जो भारत की प्राचीन मिठास परंपरा को दर्शाता है।
स्वास्थ्य के कारण भी बढ़ रही मांग
विशेषज्ञों के अनुसार, गुड़ रिफाइंड चीनी की तुलना में अधिक प्राकृतिक माना जाता है क्योंकि इसे बिना रासायनिक रिफाइनिंग के सीधे गन्ने के रस से तैयार किया जाता है।
गुड़ में:
- कैल्शियम
- मैग्नीशियम
- पोटैशियम
- आयरन
- जिंक
- कॉपर
- फॉस्फोरस
- मैंगनीज
जैसे खनिज पाए जाते हैं। अच्छी गुणवत्ता वाले गुड़ में लगभग 70 प्रतिशत से अधिक प्राकृतिक सुक्रोज मौजूद होता है।
आयुर्वेदिक चिकित्सा पद्धति में गुड़ को पाचन सुधारने, शरीर को ऊर्जा देने, गले और फेफड़ों को राहत पहुंचाने तथा शरीर को डिटॉक्स करने में सहायक माना जाता है।
तमिलनाडु मॉडल की भी हो रही चर्चा
तमिलनाडु सरकार अपने “पौष्टिक भोजन कार्यक्रम” और आईसीडीएस योजना के तहत बच्चों को दिए जाने वाले पूरक आहार में गुड़ का उपयोग करती है।
“सथुमावु” नामक पोषण मिश्रण में लगभग 27 प्रतिशत हिस्सा गुड़ का होता है। इससे बच्चों को ऊर्जा और सूक्ष्म पोषक तत्व उपलब्ध कराने का प्रयास किया जाता है।
इस योजना के जरिए महिला सहकारी समितियों और आर्थिक रूप से कमजोर महिलाओं को भी रोजगार मिला है।
सरकार की योजनाओं से मिल रहा बढ़ावा
केंद्र सरकार की प्रधानमंत्री किसान संपदा योजना (PMKSY), पीएमएफएमई योजना और “एक जिला एक उत्पाद” योजना के जरिए गुड़ आधारित उद्योगों को सहायता दी जा रही है।
सरकारी आंकड़ों के अनुसार:
- PMFME योजना के तहत 3,528 गुड़ आधारित सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण इकाइयों को सहायता दी गई
- कुल 102.31 करोड़ रुपये की सब्सिडी उपलब्ध कराई गई
- 19 जिलों में गुड़ और संबंधित उत्पादों को ODOP के तहत शामिल किया गया
- 31 दिसंबर 2025 तक पांच गुड़ प्रसंस्करण इकाइयों को मंजूरी दी गई
वर्तमान स्थिति और आगे क्या
विशेषज्ञों का मानना है कि प्राकृतिक स्वीटनर की वैश्विक मांग बढ़ने से भारतीय गुड़ उद्योग को आने वाले वर्षों में बड़ा बाजार मिल सकता है।
यदि गुणवत्ता नियंत्रण, GI टैगिंग, आधुनिक पैकेजिंग और निर्यात नेटवर्क को मजबूत किया जाता है, तो यह क्षेत्र ग्रामीण अर्थव्यवस्था और किसानों की आय बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
भारत दुनिया में कितना गुड़ उत्पादन करता है?
दुनिया भर में बनने वाले कुल गुड़ का 70 प्रतिशत से अधिक हिस्सा भारत में तैयार होता है।
भारतीय गुड़ का निर्यात कितना बढ़ा है?
वर्ष 2015-16 से 2024-25 के बीच भारतीय गुड़ निर्यात मूल्य में लगभग 106.5 प्रतिशत और मात्रा में 61.2 प्रतिशत वृद्धि दर्ज की गई है।
भारतीय गुड़ किन देशों में सबसे ज्यादा निर्यात होता है?
इंडोनेशिया, अमेरिका, संयुक्त अरब अमीरात, नेपाल और नाइजीरिया भारतीय गुड़ के प्रमुख आयातक देशों में शामिल हैं।
गुड़ को चीनी से बेहतर क्यों माना जाता है?
गुड़ बिना रासायनिक रिफाइनिंग के तैयार किया जाता है, इसलिए इसमें प्राकृतिक खनिज और सूक्ष्म पोषक तत्व सुरक्षित रहते हैं।













