नई दिल्ली: Supreme Court Video Hearing Circular के तहत भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने अदालत की कार्यप्रणाली और प्रशासनिक व्यवस्था से जुड़े कई नए निर्देश जारी किए हैं। सर्कुलर में कुछ मामलों की सुनवाई केवल वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से करने, जजों के बीच कार-पूलिंग को बढ़ावा देने और रजिस्ट्री कर्मचारियों को सीमित Work From Home की अनुमति देने की बात कही गई है।
पूरा मामला क्या है
सुप्रीम कोर्ट की ओर से 15 मई 2026 को जारी इस सर्कुलर में बताया गया कि यह निर्णय भारत सरकार के कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (DoPT) द्वारा 12 मई 2026 को जारी कार्यालय ज्ञापन के संदर्भ में लिया गया है। दस्तावेज के अनुसार अदालत की कुछ कार्यवाहियों और प्रशासनिक व्यवस्थाओं में तत्काल प्रभाव से बदलाव लागू किए गए हैं।
सर्कुलर में कहा गया है कि सोमवार, शुक्रवार और अन्य miscellaneous hearing days पर सूचीबद्ध मामलों की सुनवाई अब केवल video conferencing के माध्यम से होगी। इसके अलावा कोर्ट के आंशिक कार्य दिवसों में भी वर्चुअल सुनवाई व्यवस्था लागू रहेगी।
रजिस्ट्री को निर्देश दिया गया है कि वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग लिंक समय से भेजे जाएं और तकनीकी सहायता उपलब्ध कराई जाए ताकि अदालत की कार्यवाही प्रभावित न हो।
आम लोगों और वकीलों पर क्या असर पड़ेगा
दिल्ली सहित देश के विभिन्न राज्यों से सुप्रीम कोर्ट में आने वाले वकीलों, पक्षकारों और याचिकाकर्ताओं पर इस फैसले का सीधा असर पड़ सकता है। वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से सुनवाई होने पर कई मामलों में शारीरिक रूप से अदालत पहुंचने की आवश्यकता कम हो सकती है।
विशेष रूप से दूरदराज के राज्यों या जिलों से जुड़े मामलों में यह व्यवस्था समय और यात्रा खर्च दोनों को प्रभावित कर सकती है। हालांकि अंतिम सुनवाई व्यवस्था संबंधित मामले की प्रकृति और कोर्ट की प्रक्रिया पर निर्भर करेगी।
कानूनी प्रक्रिया से जुड़े विशेषज्ञों का मानना है कि वर्चुअल सुनवाई से प्रशासनिक दबाव कम करने और अदालत के संसाधनों के बेहतर उपयोग में मदद मिल सकती है।
जजों के लिए Car-Pooling व्यवस्था
सर्कुलर में यह भी उल्लेख किया गया है कि ईंधन की बेहतर बचत और संसाधनों के प्रभावी उपयोग के उद्देश्य से सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीशों ने आपसी सहमति से car-pooling arrangements को बढ़ावा देने का निर्णय लिया है।
यह कदम प्रशासनिक स्तर पर सरकारी संस्थानों में संसाधनों के नियंत्रित उपयोग और परिचालन लागत को कम करने के प्रयासों से जोड़कर देखा जा रहा है।
Work From Home को लेकर क्या निर्देश दिए गए
दस्तावेज के अनुसार प्रत्येक शाखा या अनुभाग में अधिकतम 50 प्रतिशत कर्मचारी सप्ताह में दो दिन तक घर से काम कर सकेंगे। हालांकि यह व्यवस्था तभी लागू होगी जब कार्यालय का नियमित कामकाज प्रभावित न हो।
Concerned Registrar को साप्ताहिक रोस्टर तैयार करने का निर्देश दिया गया है। Work From Home करने वाले कर्मचारियों को फोन पर उपलब्ध रहना होगा और आवश्यकता पड़ने पर कार्यालय आने के लिए तैयार रहना होगा।
सर्कुलर में यह भी कहा गया है कि यदि किसी शाखा में Work From Home व्यवस्था प्रभावी नहीं पाई जाती है तो संबंधित Registrar उसे संशोधित या सीमित कर सकता है।
प्रशासनिक दृष्टि से क्यों महत्वपूर्ण है यह फैसला
सुप्रीम कोर्ट का यह कदम अदालत की कार्यप्रणाली को डिजिटल और लचीले स्वरूप में बनाए रखने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। कोविड काल के दौरान वर्चुअल सुनवाई की व्यवस्था शुरू हुई थी और उसके बाद से अदालतों में तकनीकी माध्यमों का उपयोग लगातार बढ़ा है।
वर्तमान सर्कुलर में प्रशासनिक दक्षता, संसाधनों के बेहतर उपयोग और तकनीकी सुविधाओं के समन्वय पर विशेष जोर दिया गया है। इससे अदालत के भीतर कार्य विभाजन और कर्मचारियों की उपलब्धता को संतुलित करने में मदद मिल सकती है।
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Supreme Court Circular 2026 में क्या मुख्य बदलाव किए गए हैं?
सर्कुलर में वर्चुअल सुनवाई, जजों के लिए कार-पूलिंग और सीमित Work From Home व्यवस्था लागू करने के निर्देश दिए गए हैं।
किन मामलों की सुनवाई वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से होगी?
सोमवार, शुक्रवार और miscellaneous hearing days पर सूचीबद्ध मामलों की सुनवाई वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से की जाएगी।
क्या सुप्रीम कोर्ट के सभी कर्मचारी घर से काम करेंगे?
नहीं। प्रत्येक शाखा में अधिकतम 50 प्रतिशत कर्मचारियों को ही सप्ताह में दो दिन तक Work From Home की अनुमति दी जा सकती है।
क्या आम लोगों पर इस फैसले का असर पड़ेगा?
दूरदराज से आने वाले वकीलों और पक्षकारों को कुछ मामलों में यात्रा कम करनी पड़ सकती है क्योंकि सुनवाई ऑनलाइन माध्यम से होगी।
यह सर्कुलर कब जारी किया गया?
सुप्रीम कोर्ट का यह प्रशासनिक सर्कुलर 15 मई 2026 को नई दिल्ली से जारी किया गया।











