‘जी राम जी’ अधिनियम की अधिसूचना जारी, 1 जुलाई से ग्रामीण मजदूरों को मिलेगा 125 दिन रोजगार

नई दिल्ली / रायबरेली | 11 मई 2026
ग्रामीण रोजगार योजना और मजदूरों से जुड़ी सांकेतिक तस्वीर
केंद्र सरकार ने VB-G RAM G अधिनियम को 1 जुलाई 2026 से लागू करने की अधिसूचना जारी की।

जी राम जी अधिनियम 2026 को लेकर केंद्र सरकार ने आधिकारिक अधिसूचना जारी कर दी है। “विकसित भारत–जी राम जी अधिनियम” (VB-G RAM G Act) 1 जुलाई 2026 से पूरे देश में लागू होगा। सरकार का दावा है कि इस योजना के तहत ग्रामीण क्षेत्रों के मजदूर परिवारों को साल में 125 दिन तक रोजगार उपलब्ध कराया जाएगा।

ग्रामीण विकास मंत्रालय के अनुसार, इस अधिनियम का उद्देश्य केवल मजदूरी आधारित रोजगार देना नहीं बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में स्थायी आजीविका और आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देना भी है। सरकार ने संकेत दिए हैं कि योजना में स्थानीय स्तर पर विकास कार्य, जल संरक्षण, ग्रामीण आधारभूत ढांचा और कौशल आधारित कार्यों को प्राथमिकता दी जा सकती है।

नई योजना की तुलना अब मनरेगा से भी की जा रही है। मनरेगा ने वर्षों तक ग्रामीण गरीब परिवारों को रोजगार सुरक्षा प्रदान की है और संकट के समय आर्थिक सहारा भी दिया। गांवों में सड़क, तालाब, नाली, जल संरक्षण और पंचायत स्तर के निर्माण कार्यों में मनरेगा की महत्वपूर्ण भूमिका मानी जाती है।

मनरेगा में जहां 100 दिन रोजगार की व्यवस्था है, वहीं VB-G RAM G अधिनियम के तहत 125 दिन रोजगार देने का दावा किया गया है। इसके साथ ही योजना में कौशल विकास और आजीविका बढ़ाने पर भी विशेष जोर बताया जा रहा है।

सरकारी सूत्रों के मुताबिक, जी राम जी योजना की एक खासियत यह हो सकती है कि इसमें केवल पारंपरिक मजदूरी कार्य ही नहीं बल्कि ग्रामीण युवाओं और महिलाओं के लिए प्रशिक्षण आधारित रोजगार मॉडल को भी शामिल किया जाए। इससे गांवों में छोटे स्वरोजगार और स्थानीय उत्पादन इकाइयों को बढ़ावा मिलने की संभावना जताई जा रही है।

विशेषज्ञों का मानना है कि मनरेगा की सबसे बड़ी ताकत उसकी कानूनी गारंटी और पंचायत स्तर तक मजबूत व्यवस्था रही है। वहीं नई योजना की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि भुगतान प्रणाली, पारदर्शिता और कार्य आवंटन कितनी प्रभावी तरीके से लागू होता है।

जी राम जी अधिनियम की एक अन्य संभावित विशेषता ग्रामीण अर्थव्यवस्था को आधुनिक तकनीक और डिजिटल निगरानी से जोड़ना भी मानी जा रही है। इससे कार्यों की मॉनिटरिंग, मजदूरी भुगतान और परियोजनाओं की ट्रैकिंग को अधिक पारदर्शी बनाने की कोशिश की जा सकती है।

रायबरेली समेत उत्तर प्रदेश के कई जिलों में मजदूर परिवारों और ग्रामीण समुदाय के बीच इस अधिसूचना को लेकर चर्चा तेज हो गई है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि रोजगार के दिनों में वृद्धि के साथ समय पर भुगतान सुनिश्चित किया जाता है, तो इससे गांवों में आर्थिक गतिविधियों को नई गति मिल सकती है।

विशेषज्ञ यह भी याद दिलाते हैं कि मनरेगा ने ग्रामीण पलायन कम करने और गरीब परिवारों की आय बनाए रखने में अहम भूमिका निभाई थी। अब देखना होगा कि जी राम जी योजना रोजगार गारंटी के साथ ग्रामीण विकास के नए मॉडल के रूप में कितना प्रभाव छोड़ पाती है।

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जी राम जी अधिनियम की मुख्य विशेषता क्या बताई जा रही है?

इस योजना के तहत 125 दिन रोजगार देने का दावा किया गया है। साथ ही कौशल विकास, ग्रामीण आजीविका और स्थानीय आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देने पर भी जोर दिया जा रहा है।

मनरेगा और जी राम जी योजना में क्या अंतर हो सकता है?

मनरेगा मुख्य रूप से 100 दिन मजदूरी आधारित रोजगार गारंटी पर केंद्रित है, जबकि जी राम जी योजना में रोजगार के साथ कौशल प्रशिक्षण, डिजिटल मॉनिटरिंग और ग्रामीण उद्यमिता को भी शामिल करने की बात सामने आ रही है।

इस योजना से ग्रामीण मजदूरों को क्या फायदा हो सकता है?

यदि योजना प्रभावी तरीके से लागू होती है तो मजदूर परिवारों को अधिक रोजगार दिवस, स्थानीय स्तर पर आय के अवसर और गांवों में आर्थिक गतिविधियों के विस्तार का लाभ मिल सकता है।

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