सालों की सेवा पर संकट: अंडमान-निकोबार के शिक्षकों की पीड़ा लेकर दिल्ली पहुंचे प्रतिनिधि
खबर एक नजर में
| अंडमान-निकोबार शिक्षक संघ के प्रतिनिधि दिल्ली पहुंचे |
| TET अनिवार्यता पर सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद चिंता |
| 20-25 वर्षों से कार्यरत शिक्षकों में असमंजस की स्थिति |
| पोर्ट ब्लेयर में शिक्षकों में मानसिक तनाव की सूचना |
| दिल्ली आने-जाने की लागत और दूरी बनी बड़ी चुनौती |
| स्थानीय स्तर पर जनप्रतिनिधित्व सीमित होने की बात सामने आई |
| शिक्षक संगठनों ने सहयोग का आश्वासन दिया |
विस्तृत खबर
अंडमान-निकोबार शिक्षक संघ के अध्यक्ष श्री प्रेम कुमार साधु और महासचिव श्री विकास मंडल हाल ही में दिल्ली पहुंचे, जहां उन्होंने विभिन्न प्रतिनिधियों से मुलाकात कर शिक्षकों की स्थिति पर चर्चा की। यह मुलाकात TET अनिवार्यता से जुड़े हालिया सुप्रीम कोर्ट आदेश के संदर्भ में हुई।
प्रतिनिधियों के अनुसार, 25 मार्च को जारी एक पत्र के बाद अंडमान-निकोबार में शिक्षकों के लिए TET पास करना अनिवार्य कर दिया गया है। इससे उन शिक्षकों में असमंजस की स्थिति उत्पन्न हो गई है जो RTE लागू होने से पहले नियुक्त हुए थे और पिछले 20 से 25 वर्षों से सेवा दे रहे हैं।
महासचिव श्री विकास मंडल ने बताया कि पोर्ट ब्लेयर सहित अन्य क्षेत्रों में शिक्षकों के बीच मानसिक तनाव की स्थिति देखी जा रही है। उन्होंने यह भी कहा कि क्षेत्र में सीमित जनप्रतिनिधित्व के कारण प्रशासनिक स्तर पर संवाद स्थापित करना चुनौतीपूर्ण है।
शिक्षक नेताओं ने बताया कि दिल्ली तक पहुंचना भी आर्थिक और भौगोलिक दृष्टि से कठिन है। हवाई यात्रा का खर्च एक तरफ का लगभग 61,000 रुपये बताया गया, जबकि समुद्री मार्ग से यात्रा करने में कई दिन लगते हैं और अतिरिक्त खर्च भी जुड़ता है।
इसके अलावा, द्वीप समूह के कई स्कूल दूरस्थ द्वीपों पर स्थित हैं, जहां पहुंचने के लिए छोटी नाव ही एकमात्र साधन है। मौसम खराब होने की स्थिति में शिक्षकों को कई दिनों तक वहीं रुकना पड़ता है।
शिक्षक नेताओं ने यह भी उल्लेख किया कि स्थानीय स्तर पर वैकल्पिक रोजगार के अवसर सीमित हैं, जिससे नौकरी से जुड़े किसी भी बदलाव का सीधा प्रभाव आजीविका पर पड़ सकता है।
दिल्ली प्रवास के दौरान उन्होंने विभिन्न जनप्रतिनिधियों से मुलाकात की और अपनी स्थिति से अवगत कराया। शिक्षक संगठनों की ओर से उन्हें सहयोग का आश्वासन दिया गया है तथा आगे की बैठकें आयोजित करने की बात कही गई है।
सूत्रों के अनुसार, आगामी समय में इस मुद्दे पर और संवाद तथा बैठकों की संभावना जताई जा रही है, जिसमें अंडमान-निकोबार के शिक्षकों की समस्याओं को प्रमुखता से उठाया जाएगा।











