गुजरात के सूरत-भरूच सेक्शन में 1 मई से देश का पहला बैरियरलेस टोल सिस्टम लागू किया गया है, जहां वाहन बिना रुके गुजरते हैं और कैमरा व Fastag तकनीक के जरिए टोल अपने आप कट जाता है। इस नई MLFF प्रणाली में पूरी प्रक्रिया डिजिटल है और भुगतान, पहचान तथा कार्रवाई सभी सिस्टम के माध्यम से स्वतः संचालित होते हैं।
भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) द्वारा लागू मल्टी-लेन फ्री फ्लो (MLFF) प्रणाली में टोल प्लाजा पर कोई बैरियर नहीं होता। हाईवे पर लगाए गए कैमरे और सेंसर ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकग्निशन (ANPR) तकनीक के जरिए वाहन की पहचान करते हैं। जैसे ही वाहन टोल जोन से गुजरता है, उसकी नंबर प्लेट की फोटो ली जाती है और डेटा तुरंत केंद्रीय सर्वर पर भेजा जाता है।
सिस्टम में वाहन की जानकारी Fastag खाते और परिवहन विभाग के रजिस्ट्रेशन डेटाबेस से जुड़ी होती है। वाहन की श्रेणी (कार, बस, ट्रक) के अनुसार पहले से निर्धारित टोल दर स्वतः लागू होती है और Fastag खाते से राशि कट जाती है।
यदि Fastag में पर्याप्त बैलेंस नहीं है या टैग अमान्य/खराब है, तो तत्काल भुगतान नहीं हो पाता। ऐसे मामलों में वाहन मालिक को ई-नोटिस जारी किया जाता है, जिसमें बकाया टोल की जानकारी होती है। यह नोटिस ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से देखा जा सकता है।
नियमों के अनुसार, वाहन मालिक को ई-नोटिस जारी होने के 72 घंटे के भीतर टोल शुल्क का भुगतान करना होता है। यदि इस समय सीमा के भीतर भुगतान नहीं किया जाता, तो दोगुना टोल शुल्क लागू किया जा सकता है।
इसके अलावा, लगातार भुगतान न करने या नियमों का उल्लंघन करने पर Fastag को ब्लैकलिस्ट किया जा सकता है। ऐसी स्थिति में वाहन को अन्य टोल प्लाजा पर भी दिक्कत हो सकती है और वाहन से जुड़ी कुछ सेवाओं पर प्रतिबंध लगने की संभावना रहती है।
इस प्रणाली का एक महत्वपूर्ण पहलू यह भी है कि इसमें सभी लेन एक साथ सक्रिय रहती हैं, जिससे वाहनों को किसी विशेष लाइन में रुकने की जरूरत नहीं होती। इससे ट्रैफिक जाम कम, यात्रा समय में सुधार और ईंधन की बचत जैसे फायदे मिलते हैं।
स्थानीय स्तर पर सूरत और भरूच के बीच यात्रा करने वाले वाहन चालकों का कहना है कि यह प्रणाली लंबी दूरी के सफर को आसान बना सकती है। वहीं देश के अन्य शहरों में भी भविष्य में इस तकनीक को लागू करने की संभावनाएं जताई जा रही हैं।
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अगर Fastag में पैसे नहीं हैं तो टोल कैसे वसूला जाएगा?
ऐसी स्थिति में वाहन की नंबर प्लेट के आधार पर ई-नोटिस जारी किया जाएगा, जिसे बाद में ऑनलाइन भुगतान करना होगा।
72 घंटे में भुगतान न करने पर क्या होगा?
यदि निर्धारित समय में भुगतान नहीं किया गया, तो वाहन मालिक से सामान्य टोल का दोगुना शुल्क वसूला जा सकता है।
क्या बार-बार भुगतान न करने पर कोई कार्रवाई होती है?
हाँ, बार-बार उल्लंघन करने पर Fastag को ब्लैकलिस्ट किया जा सकता है और वाहन से जुड़ी सेवाओं पर प्रतिबंध लग सकता है।












