लोकसभा अध्यक्ष द्वारा वर्ष 2026-27 के लिए पब्लिक अकाउंट्स कमेटी (PAC) का गठन किया गया है, जिसमें केरल के सांसद के. सी. वेणुगोपाल को चेयरपर्सन नियुक्त किया गया है। यह समिति केंद्र सरकार के खर्चों की जांच करती है और देशभर में वित्तीय पारदर्शिता सुनिश्चित करने में अहम भूमिका निभाती है।
जारी सूची के अनुसार, इस समिति में कुल 22 सदस्य शामिल किए गए हैं, जिनमें 15 सदस्य लोकसभा और 7 सदस्य राज्यसभा से हैं। यह समिति हर साल पुनर्गठित होती है और इसका कार्यकाल एक वर्ष का होता है।
लोकसभा से शामिल प्रमुख सदस्यों में टी. आर. बालू, कल्याण बनर्जी, निशिकांत दुबे, रवि शंकर प्रसाद, तेजस्वी सूर्या और अनुराग सिंह ठाकुर जैसे नाम शामिल हैं। वहीं राज्यसभा से प्रफुल पटेल, सुधांशु त्रिवेदी और अन्य सदस्यों को शामिल किया गया है। एक पद अभी Vacant रखा गया है।
पारंपरिक रूप से PAC का चेयरपर्सन विपक्ष से चुना जाता है, लेकिन इसकी नियुक्ति का अधिकार लोकसभा अध्यक्ष के पास होता है। इस बार के. सी. वेणुगोपाल को यह जिम्मेदारी दी गई है।
कौन हैं के. सी. वेणुगोपाल?
के.सी. वेणुगोपाल (K.C. Venugopal) भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (INC) के एक वरिष्ठ नेता हैं और संगठन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। वे वर्ष 2024 के लोकसभा चुनाव में केरल की अलाप्पुझा सीट से सांसद चुने गए हैं। संसद और पार्टी संगठन दोनों में उनकी सक्रिय भूमिका के कारण उन्हें इस महत्वपूर्ण समिति की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
PAC क्या है और कैसे काम करती है?
पब्लिक अकाउंट्स कमेटी का मुख्य काम सरकार द्वारा खर्च किए गए पैसों की जांच करना होता है। यह देखती है कि संसद द्वारा स्वीकृत बजट का उपयोग सही तरीके से हुआ या नहीं। इसके लिए समिति CAG (Comptroller and Auditor General) की रिपोर्ट का अध्ययन करती है और उसमें पाई गई गड़बड़ियों पर सवाल उठाती है।
इस समिति का गठन पहली बार 1921 में हुआ था और आज भी यह संसद की जवाबदेही व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा है। खास बात यह है कि कोई भी मंत्री इसका सदस्य नहीं बन सकता, जिससे इसकी जांच निष्पक्ष बनी रहे।
स्थानीय और राष्ट्रीय प्रभाव
रायबरेली, लखनऊ समेत उत्तर प्रदेश के कई क्षेत्रों में सरकारी योजनाओं और खर्चों की निगरानी के लिए PAC की रिपोर्ट अहम मानी जाती है। यदि किसी योजना में अनियमितता सामने आती है तो उसका सीधा असर स्थानीय प्रशासन और आम लोगों पर पड़ता है। इसी वजह से PAC की सिफारिशें नीतिगत फैसलों को भी प्रभावित करती हैं।
देशभर में बड़े प्रोजेक्ट, इंफ्रास्ट्रक्चर, स्वास्थ्य और शिक्षा से जुड़े खर्चों की पारदर्शिता सुनिश्चित करने में यह समिति अहम भूमिका निभाती है।
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Public Accounts Committee में कितने सदस्य होते हैं?
इस समिति में अधिकतम 22 सदस्य होते हैं, जिनमें 15 लोकसभा और 7 राज्यसभा से लिए जाते हैं।
PAC का गठन कब और कैसे होता है?
यह समिति हर साल लोकसभा अध्यक्ष द्वारा गठित की जाती है और इसका कार्यकाल एक वर्ष का होता है।
PAC किन मामलों की जांच करती है?
PAC सरकार के खर्च, CAG रिपोर्ट और वित्तीय अनियमितताओं की जांच करती है और सुधार के लिए सिफारिशें देती है।













