अब फिल्मों की रिलीज पर रहेगी शशि शेखर वेम्पति की नजर, केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड के बने नए अध्यक्ष

नई दिल्ली | 06 मई 2026
शशि शेखर वेम्पति केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड के नए अध्यक्ष नियुक्त
भारत सरकार ने शशि शेखर वेम्पति को केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड का नया अध्यक्ष नियुक्त किया।

भारत सरकार ने शशि शेखर वेम्पति को केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (CBFC) का नया अध्यक्ष नियुक्त किया है। सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार वे कार्यभार ग्रहण करने की तारीख से अगले तीन वर्षों तक इस पद पर रहेंगे। यह नियुक्ति ऐसे समय हुई है जब फिल्मों, वेब कंटेंट और डिजिटल प्लेटफॉर्म पर दिखाई जाने वाली सामग्री को लेकर सेंसरशिप और सामाजिक जिम्मेदारी पर देशभर में बहस तेज है।

सीबीएफसी के पूर्व अध्यक्ष प्रसून जोशी को हाल ही में प्रसार भारती का अध्यक्ष नियुक्त किया गया था, जिसके बाद यह पद खाली हुआ था। अब शशि शेखर वेम्पति को यह अहम जिम्मेदारी सौंपी गई है। वे मीडिया, प्रसारण, डिजिटल कम्युनिकेशन और सार्वजनिक नीति के क्षेत्र में लंबे समय से सक्रिय रहे हैं।

शशि शेखर वेम्पति पूर्व में प्रसार भारती के CEO भी रह चुके हैं। इसके अलावा वे AT4IndiaOrg के Co-Founder और BharatGen के बोर्ड सदस्य हैं। वे IIT Bombay के पूर्व छात्र हैं और Infosys से भी जुड़े रहे हैं। सार्वजनिक संचार, तकनीक और मीडिया क्षेत्र में उनके अनुभव को देखते हुए सरकार ने उन्हें यह नई जिम्मेदारी सौंपी है।

केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड भारत में फिल्मों, ट्रेलर, विज्ञापन फिल्मों और सार्वजनिक प्रदर्शन वाले विजुअल कंटेंट को प्रमाणित करने का कार्य करता है।

भारत में कोई भी फिल्म सिनेमाघरों में रिलीज होने से पहले सिनेमैटोग्राफ अधिनियम 1952 के तहत सीबीएफसी से प्रमाणपत्र लेना अनिवार्य होता है। बोर्ड फिल्मों को उनकी सामग्री के आधार पर U, U/A, A और S जैसी श्रेणियों में प्रमाणित करता है। यदि किसी फिल्म में हिंसा, अश्लीलता, राष्ट्रीय सुरक्षा, धार्मिक संवेदनशीलता या सांप्रदायिक सौहार्द से जुड़े विवादित दृश्य या संवाद पाए जाते हैं, तो बोर्ड उनमें बदलाव या कट लगाने के निर्देश भी दे सकता है।

फिल्म उद्योग में सीबीएफसी की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है क्योंकि यह तय करता है कि कौन-सा कंटेंट किस आयु वर्ग के दर्शकों के लिए उपयुक्त है। हाल के वर्षों में कई फिल्मों और वेब कंटेंट को लेकर विवाद सामने आए थे, जिसके बाद बोर्ड की कार्यप्रणाली और निर्णयों पर भी राष्ट्रीय स्तर पर बहस हुई थी। ऐसे में नए अध्यक्ष की नियुक्ति को फिल्म उद्योग और दर्शकों दोनों के लिए अहम माना जा रहा है।

शशि शेखर वेम्पति एक लेखक भी हैं। उनकी पुस्तक “Collective Spirit, Concrete Action” प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के “मन की बात” कार्यक्रम के सामाजिक प्रभावों पर आधारित बताई जाती है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर भी वे सार्वजनिक नीति, तकनीक और मीडिया से जुड़े विषयों पर सक्रिय रहते हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि डिजिटल दौर में कंटेंट की तेजी से बदलती प्रकृति के बीच सीबीएफसी के सामने संतुलन बनाए रखने की चुनौती होगी। एक ओर रचनात्मक स्वतंत्रता का मुद्दा है, वहीं दूसरी ओर सामाजिक संवेदनशीलता और कानूनी दायित्व भी जुड़े हैं।

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सीबीएफसी फिल्मों को कौन-कौन से सर्टिफिकेट देता है?

केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड फिल्मों को मुख्य रूप से U (सभी के लिए), U/A (अभिभावक की सलाह के साथ), A (केवल वयस्कों के लिए) और S (विशेष वर्ग के लिए) श्रेणियों में प्रमाणित करता है।

क्या बिना CBFC प्रमाणन के फिल्म रिलीज हो सकती है?

नहीं। भारत में सिनेमाघरों में सार्वजनिक प्रदर्शन के लिए किसी भी फिल्म को रिलीज करने से पहले CBFC का प्रमाणपत्र लेना कानूनी रूप से अनिवार्य है।

शशि शेखर वेम्पति के सामने सबसे बड़ी चुनौती क्या होगी?

डिजिटल और सोशल मीडिया के दौर में तेजी से बदलते कंटेंट के बीच रचनात्मक स्वतंत्रता, सामाजिक संवेदनशीलता और कानूनी मानकों के बीच संतुलन बनाए रखना सबसे बड़ी चुनौती माना जा रहा है।

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