चेन्नई में शुरू हुआ हाईटेक मौसम केंद्र, भारी बारिश और बाढ़ की चेतावनी अब होगी ज्यादा सटीक

चेन्नई | 6 मई 2026
चेन्नई में शहरी परीक्षण केंद्र और एरोसोल वेधशाला का उद्घाटन
चेन्नई में मिशन मौसम के तहत स्थापित शहरी परीक्षण केंद्र और एरोसोल वेधशाला का उद्घाटन करते पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के अधिकारी।

चेन्नई में मौसम की सटीक जानकारी और समय रहते चेतावनी देने के लिए केंद्र सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है। पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के तहत मिशन मौसम पहल में चेन्नई के रामपुरम स्थित एसआरएम विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी संस्थान में अत्याधुनिक शहरी परीक्षण केंद्र और एरोसोल वेधशाला शुरू की गई है। इसका सीधा फायदा चेन्नई जैसे तटीय शहरों में रहने वाले लोगों को मिलेगा, जहां हर साल भारी बारिश, जलभराव, गर्मी और मौसम में अचानक बदलाव बड़ी चुनौती बनते हैं।

पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के सचिव डॉ. एम. रविचंद्रन ने इस सुविधा का उद्घाटन किया। इस केंद्र में करीब 60 करोड़ रुपये के आधुनिक उपकरण लगाए गए हैं, जो हवा, तापमान, बारिश, समुद्री हवाओं और प्रदूषण के महीन कणों पर लगातार नजर रखेंगे। वैज्ञानिकों का कहना है कि इससे शहर के अलग-अलग इलाकों के मौसम को ज्यादा सटीक तरीके से समझा जा सकेगा।

चेन्नई में अब मौसम की निगरानी सिर्फ सामान्य पूर्वानुमान तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि इलाकेवार बारिश, गर्मी और हवाओं के बदलाव की जानकारी पहले से मिल सकेगी।

इस परियोजना के तहत चेन्नई और आसपास के क्षेत्रों में लगभग 100 ऑटोमेटिक वेदर स्टेशन लगाए जाएंगे। इसके अलावा एक्स-बैंड रडार और फेज्ड ऐरे रडार जैसे सिस्टम भी लगाए जा रहे हैं, जो शहर की ओर बढ़ने वाले बारिश वाले बादलों और तेज मौसम गतिविधियों को लगातार ट्रैक करेंगे। इसका उपयोग खासतौर पर बाढ़ जैसी स्थिति में पहले अलर्ट जारी करने के लिए किया जाएगा।

चेन्नई लंबे समय से शहरी बाढ़ और अत्यधिक बारिश की समस्या से जूझता रहा है। वर्ष 2015 की विनाशकारी बाढ़ और उसके बाद कई बार हुई भारी बारिश ने मौसम पूर्वानुमान प्रणाली को मजबूत करने की जरूरत को सामने रखा था। इसी पृष्ठभूमि में यह नई वेधशाला शहर के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

इस केंद्र में हवा में मौजूद धूल, धुआं और सूक्ष्म कणों का भी अध्ययन किया जाएगा। वैज्ञानिक यह समझने की कोशिश करेंगे कि प्रदूषण, समुद्री हवाएं और तापमान मिलकर बारिश तथा मौसम के पैटर्न को किस तरह प्रभावित करते हैं। इससे भविष्य में हीटवेव और जलवायु परिवर्तन के असर को समझने में भी मदद मिलेगी।

मिशन मौसम का उद्देश्य भारत को “मौसम के लिए तैयार और जलवायु-स्मार्ट राष्ट्र” बनाना है, ताकि समय रहते चेतावनी देकर जान-माल के नुकसान को कम किया जा सके।

केंद्र सरकार ने सितंबर 2024 में मिशन मौसम की शुरुआत की थी। इस योजना के तहत देशभर में मौसम निगरानी प्रणाली को आधुनिक बनाया जा रहा है। इसका मकसद मानसून, चक्रवात, भारी बारिश और गंभीर मौसम की घटनाओं का ज्यादा सटीक पूर्वानुमान देना है। चेन्नई में शुरू हुआ यह नया केंद्र उसी मिशन का हिस्सा है और भविष्य में दूसरे बड़े शहरों के लिए भी मॉडल बन सकता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि बेहतर मौसम चेतावनी प्रणाली का फायदा सिर्फ प्रशासन को ही नहीं, बल्कि आम नागरिकों, मछुआरों, यात्रियों, स्कूलों, एयरपोर्ट और आपदा प्रबंधन एजेंसियों को भी मिलेगा।

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चेन्नई में बना यह नया मौसम केंद्र क्या काम करेगा?

यह केंद्र शहर के अलग-अलग इलाकों के मौसम, बारिश, हवाओं और प्रदूषण की निगरानी करेगा। इससे भारी बारिश, जलभराव और तेज मौसम बदलाव की पहले चेतावनी देने में मदद मिलेगी।

मिशन मौसम का आम लोगों को क्या फायदा होगा?

मिशन मौसम के जरिए मौसम पूर्वानुमान ज्यादा सटीक बनाने की कोशिश हो रही है। इससे लोगों को समय रहते अलर्ट मिलेगा और बाढ़, चक्रवात या हीटवेव जैसी स्थितियों में नुकसान कम किया जा सकेगा।

एरोसोल वेधशाला क्यों महत्वपूर्ण मानी जा रही है?

यह वेधशाला हवा में मौजूद धूल, धुएं और प्रदूषण कणों का अध्ययन करेगी। इससे यह समझने में मदद मिलेगी कि प्रदूषण और मौसम एक-दूसरे को कैसे प्रभावित करते हैं।

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