समुद्र में तिरंगा भारत: स्वराज द्वीप पर बना गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड

अंडमान-निकोबार | 02 मई 2026
समुद्र में तिरंगा भारत स्वराज द्वीप के पास पानी के नीचे तिरंगा फहराते गोताखोर
स्वराज द्वीप के पास समुद्र की गहराई में तिरंगा प्रदर्शित करते गोताखोर

समुद्र में तिरंगा भारत ने 2 मई को अंडमान-निकोबार के स्वराज द्वीप (पूर्व में हैवलॉक द्वीप) के पास एक नया इतिहास रच दिया। समुद्र की गहराई में विशाल तिरंगा फहराकर भारत ने गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड में अपना नाम दर्ज कराया। इस उपलब्धि का असर क्षेत्र की अंतरराष्ट्रीय पहचान, पर्यटन और राष्ट्रीय गौरव पर पड़ने की संभावना है।

इस विशेष अभियान में कुल 223 गोताखोर शामिल हुए, जिन्होंने समुद्र के भीतर समन्वय और तकनीकी कौशल के साथ तिरंगे को प्रदर्शित किया। लगभग 60 मीटर × 40 मीटर आकार का यह तिरंगा समुद्र की गहराई में संतुलन बनाए रखना एक बड़ी चुनौती थी।

समुद्र की गहराई में तिरंगा फहराने की इस उपलब्धि को गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड में आधिकारिक मान्यता मिली

अधिकारियों के अनुसार, इस मिशन में भारतीय नौसेना, स्थानीय प्रशासन और प्रशिक्षित गोताखोरों की संयुक्त भागीदारी रही। इस प्रकार के आयोजन से यह भी स्पष्ट होता है कि भारत समुद्री क्षेत्रों में तकनीकी और सामूहिक क्षमता दोनों में मजबूत स्थिति रखता है।

स्वराज द्वीप का नाम वर्ष 2018 में बदला गया था। इससे पहले इसे हैवलॉक द्वीप कहा जाता था। प्रधानमंत्री द्वारा अंडमान दौरे के दौरान इस द्वीप का नाम बदलकर स्वतंत्रता संग्राम की विरासत से जोड़ते हुए “स्वराज द्वीप” रखा गया।

अंडमान-निकोबार द्वीप समूह भारत के दक्षिण-पूर्व में बंगाल की खाड़ी में स्थित है और इसमें 500 से अधिक द्वीप शामिल हैं। यह क्षेत्र अपनी समुद्री जैव विविधता, प्रवाल भित्तियों और पर्यटन के लिए विश्वभर में प्रसिद्ध है।

गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड की स्थापना 1955 में हुई थी और यह संस्था दुनिया भर के अनोखे और उल्लेखनीय रिकॉर्ड्स को प्रमाणित करती है। किसी भी उपलब्धि का इसमें दर्ज होना अंतरराष्ट्रीय पहचान का प्रतीक माना जाता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि समुद्र में तिरंगा भारत जैसी उपलब्धियां देश की वैश्विक छवि को मजबूत करती हैं और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पर्यटन को बढ़ावा देती हैं। इससे स्थानीय स्तर पर रोजगार और आर्थिक गतिविधियों में भी वृद्धि हो सकती है।

स्वराज द्वीप अंडमान-निकोबार द्वीप समूह का प्रमुख पर्यटन केंद्र है और यह स्कूबा डाइविंग तथा एडवेंचर गतिविधियों के लिए जाना जाता है। हर वर्ष यहां बड़ी संख्या में देश-विदेश से पर्यटक पहुंचते हैं।

इस उपलब्धि से समुद्र में तिरंगा भारत की पहचान वैश्विक स्तर पर और मजबूत हुई है। साथ ही, यह अभियान पर्यावरण जागरूकता और समुद्री संरक्षण के महत्व को भी दर्शाता है।

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स्वराज द्वीप का नाम कब बदला गया था?

वर्ष 2018 में हैवलॉक द्वीप का नाम बदलकर स्वराज द्वीप रखा गया था, ताकि इसे स्वतंत्रता आंदोलन से जोड़ा जा सके।

गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड क्या होता है?

यह एक अंतरराष्ट्रीय संस्था है जो दुनिया भर में बनाए गए रिकॉर्ड्स को प्रमाणित करती है और 1955 से कार्यरत है।

इस रिकॉर्ड से क्षेत्र को क्या फायदा होगा?

इससे पर्यटन, रोजगार और अंतरराष्ट्रीय पहचान में वृद्धि होने की संभावना है, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को लाभ मिल सकता है।

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