अंतरराष्ट्रीय वन दिवस पर लखनऊ में ‘ राष्ट्रीय वानिकी संवाद’ का आयोजन: CM योगी आदित्यनाथ ने 100 साल पुराने पेड़ों को ‘विरासत वृक्ष’ बनाने का ऐलान
अंतरराष्ट्रीय वन दिवस के अवसर पर लखनऊ में आयोजित राष्ट्रीय वानिकी संवाद कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ शामिल हुए। इस कार्यक्रम का आयोजन ‘वन एवं अर्थव्यवस्थाएं’ विषयक राष्ट्रीय वानिकी संवाद के अंतर्गत किया गया, जिसमें वन संरक्षण और आर्थिक विकास के बीच संबंधों पर चर्चा की गई।
कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री द्वारा मानव-वन्यजीव संघर्ष के समाधान तथा वानिकी क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने वाले आमजन, सामाजिक संगठनों, वन विभाग के कार्मिकों और पौधरोपण में अग्रणी किसानों को सम्मानित किया गया। साथ ही, वन्यजीव और वन विभाग से संबंधित विभिन्न पुस्तकों का विमोचन भी किया गया।
मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि जब कोई अभियान जन-आंदोलन का रूप ले लेता है, तो उसकी सफलता सुनिश्चित हो जाती है। उन्होंने बताया कि पिछले नौ वर्षों में उत्तर प्रदेश ने वन आच्छादन बढ़ाने में उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल की है, जिससे हरित विकास को नई दिशा मिली है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान न केवल व्यक्तिगत जिम्मेदारी को दर्शाता है, बल्कि यह धरती माता के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का एक माध्यम भी है। उन्होंने वैदिक वाक्य “माता भूमिः पुत्रोऽहं पृथिव्याः” का उल्लेख करते हुए पर्यावरण संरक्षण के प्रति सामूहिक दायित्व पर जोर दिया।
कार्यक्रम में बताया गया कि राज्य में गंगा, यमुना और सरयू जैसी प्रमुख नदियों के किनारे व्यापक वृक्षारोपण अभियान चलाए गए हैं। इसके साथ ही, सभी 75 जिलों में कम से कम एक नदी के पुनरुद्धार का कार्य भी पूरा किया गया है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि वन केवल मानव जीवन के लिए ही नहीं, बल्कि संपूर्ण जीव-जगत के लिए आवश्यक हैं। उन्होंने यह भी बताया कि 100 वर्ष से अधिक पुराने पेड़ों को विरासत वृक्ष के रूप में संरक्षित किया जाएगा और इनके संरक्षण के लिए जागरूकता अभियान चलाए जाएंगे।
उन्होंने कहा कि वन, जल, वायु और जीवन के बीच गहरा संबंध है और इनका संरक्षण सतत विकास के लिए आवश्यक है। कार्यक्रम के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण और वानिकी क्षेत्र में जनभागीदारी बढ़ाने पर विशेष बल दिया गया।











