उत्तराखंड में गंगा पर नई पनबिजली परियोजनाओं पर रोक, केंद्र का बड़ा फैसला

देहरादून, उत्तराखंड | 21 मई 2026
उत्तराखंड में गंगा नदी का प्रवाह और पनबिजली परियोजनाएं
गंगा के अविरल प्रवाह को लेकर केंद्र सरकार ने नई पनबिजली परियोजनाओं पर बड़ा निर्णय लिया।

गंगा पनबिजली परियोजना को लेकर केंद्र सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। उत्तराखंड में अब नई पनबिजली परियोजनाएं शुरू नहीं होंगी। गंगा नदी के अविरल प्रवाह को बनाए रखने के लिए केंद्र सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। अब गंगा और उसकी प्रमुख सहायक धाराओं पर कोई नई पनबिजली परियोजना शुरू नहीं की जाएगी। केंद्र सरकार ने सर्वोच्च न्यायालय को जानकारी देते हुए बताया कि पहले प्रस्तावित 28 परियोजनाओं में से अब केवल वर्तमान में चल रही सात परियोजनाओं पर ही काम जारी रहेगा।

यह निर्णय जल शक्ति मंत्रालय, ऊर्जा मंत्रालय और पर्यावरण मंत्रालय के संयुक्त विचार-विमर्श के बाद लिया गया है। सरकार का कहना है कि गंगा नदी के प्राकृतिक प्रवाह, जैव विविधता और पर्यावरणीय संतुलन को ध्यान में रखते हुए यह कदम उठाया गया है।

पहले 28 परियोजनाओं का प्रस्ताव था, लेकिन अब केवल सात मौजूदा परियोजनाओं पर ही निर्माण कार्य जारी रहेगा।

गौरतलब है कि पिछले कई वर्षों से पर्यावरणविदों, धार्मिक संगठनों और स्थानीय समुदायों द्वारा गंगा नदी पर लगातार बढ़ती पनबिजली परियोजनाओं का विरोध किया जा रहा था। उनका तर्क था कि सुरंग आधारित परियोजनाओं और बांध निर्माण से नदी का प्राकृतिक स्वरूप प्रभावित हो रहा है और कई हिस्सों में गंगा का जल प्रवाह कम दिखाई देने लगा था।

विशेषज्ञों के अनुसार, उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर पनबिजली परियोजनाओं के कारण भूस्खलन, पारिस्थितिकी असंतुलन और जल संकट जैसी समस्याएं भी बढ़ी हैं। चारधाम मार्ग और अन्य निर्माण परियोजनाओं के बीच यह फैसला पर्यावरण संरक्षण के दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

देहरादून और ऋषिकेश क्षेत्र के कई सामाजिक संगठनों ने केंद्र सरकार के इस निर्णय का स्वागत किया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि गंगा केवल जल स्रोत नहीं बल्कि करोड़ों लोगों की आस्था और आजीविका से भी जुड़ी हुई है। पर्यटन और धार्मिक गतिविधियों पर भी इसका सीधा प्रभाव पड़ता है।

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हालांकि ऊर्जा क्षेत्र से जुड़े कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि उत्तराखंड जैसे पर्वतीय राज्य में जलविद्युत परियोजनाएं बिजली उत्पादन का बड़ा स्रोत रही हैं। ऐसे में नई परियोजनाओं पर रोक से भविष्य की ऊर्जा योजनाओं पर असर पड़ सकता है। इसके बावजूद केंद्र सरकार ने स्पष्ट किया है कि पर्यावरणीय संवेदनशीलता और गंगा संरक्षण को प्राथमिकता दी जाएगी।

दिलचस्प बात यह है कि अन्य राज्यों जैसे हिमाचल प्रदेश और पूर्वोत्तर क्षेत्रों में अभी भी कई जलविद्युत परियोजनाओं पर काम जारी है, लेकिन उत्तराखंड में गंगा बेसिन को लेकर विशेष सतर्कता बरती जा रही है। विशेषज्ञ इसे भविष्य में नदी संरक्षण नीतियों के लिए एक मॉडल निर्णय के रूप में भी देख रहे हैं।

सर्वोच्च न्यायालय में दी गई जानकारी के बाद अब माना जा रहा है कि आने वाले समय में गंगा संरक्षण से जुड़े नियम और सख्त किए जा सकते हैं। इससे भविष्य की परियोजनाओं के लिए पर्यावरणीय मंजूरी प्रक्रिया और अधिक कड़ी हो सकती है।

गंगा परियोजनाओं पर फैसले का संभावित असर

इस निर्णय का असर केवल उत्तराखंड तक सीमित नहीं रहेगा। गंगा बेसिन से जुड़े राज्यों जैसे उत्तर प्रदेश, बिहार और पश्चिम बंगाल में भी नदी संरक्षण की नीतियों पर इसका प्रभाव पड़ सकता है। धार्मिक पर्यटन, जल गुणवत्ता और पारिस्थितिकी संरक्षण के क्षेत्र में यह फैसला महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

FAQ

प्रश्न 1: केंद्र सरकार ने यह फैसला क्यों लिया?
गंगा के प्राकृतिक प्रवाह, पर्यावरणीय संतुलन और नदी संरक्षण को ध्यान में रखते हुए नई पनबिजली परियोजनाओं पर रोक लगाने का निर्णय लिया गया है।

प्रश्न 2: क्या सभी पनबिजली परियोजनाएं बंद होंगी?
नहीं। केवल नई परियोजनाओं को रोका गया है। वर्तमान में निर्माणाधीन सात परियोजनाओं पर काम जारी रहेगा।

प्रश्न 3: इसका स्थानीय लोगों पर क्या असर पड़ेगा?
विशेषज्ञों के अनुसार इससे गंगा का जल प्रवाह बेहतर बना रह सकता है, धार्मिक पर्यटन और पर्यावरण संरक्षण को लाभ मिल सकता है।

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