वैश्विक तनाव के बीच भारत में ईंधन आपूर्ति सामान्य, सरकार ने स्थिति पर बना रखा है नियंत्रण
पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय में संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा द्वारा जारी आधिकारिक बयान के अनुसार, वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों, विशेषकर मध्य-पूर्व में बढ़ते तनाव के बावजूद भारत में ईंधन आपूर्ति पूरी तरह सामान्य बनी हुई है।
उन्होंने बताया कि कच्चे तेल, LPG और LNG की अंतरराष्ट्रीय कीमतों और आपूर्ति पर असर पड़ा है, लेकिन भारत सरकार ने प्रभावी प्रबंधन के माध्यम से देश में स्थिति को नियंत्रित रखा है।
सरकारी जानकारी के अनुसार, देश में इस समय पर्याप्त मात्रा में कच्चे तेल का भंडार उपलब्ध है और अगले दो महीनों तक आपूर्ति सुनिश्चित की गई है। सरकार ने विभिन्न स्तरों पर समन्वय करते हुए आवश्यक निर्णय लिए हैं ताकि उपभोक्ताओं को किसी प्रकार की असुविधा न हो।
घरेलू उपभोक्ताओं को प्राथमिकता देने के उद्देश्य से प्रारंभिक चरण में वाणिज्यिक एलपीजी आपूर्ति को अस्थायी रूप से सीमित किया गया था। बाद में इसे चरणबद्ध तरीके से बहाल किया गया—पहले 20 प्रतिशत, फिर 50 प्रतिशत और वर्तमान में इसे बढ़ाकर 70 प्रतिशत कर दिया गया है।
14 मार्च से अब तक लगभग 30,000 टन वाणिज्यिक एलपीजी की आपूर्ति की जा चुकी है। इसमें रेस्टोरेंट, ढाबा, होटल, औद्योगिक कैंटीन और प्रवासी श्रमिकों को प्राथमिकता दी गई है। साथ ही प्रवासी श्रमिकों के लिए 5 किलोग्राम के सिलेंडर भी उपलब्ध कराए गए हैं।
कुछ स्थानों पर अफवाहों के चलते पेट्रोल पंपों पर भीड़ देखी गई, हालांकि अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि वास्तविक स्थिति में किसी भी उत्पाद की कमी नहीं है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत 70 डॉलर प्रति बैरल से बढ़कर 100 डॉलर से अधिक होने के बावजूद देश में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में वृद्धि नहीं की गई है।
सरकार ने उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त बोझ न डालते हुए एक्साइज ड्यूटी में कमी कर इसका भार स्वयं वहन किया है। अप्रैल 2022 से अब तक पेट्रोल और डीजल की कीमतें या तो कम हुई हैं या स्थिर बनी हुई हैं। अप्रैल 2025 में एक्साइज ड्यूटी बढ़ने के बावजूद इसका प्रभाव उपभोक्ताओं पर नहीं डाला गया।
सुजाता शर्मा ने पुनः स्पष्ट किया है कि देश में ईंधन आपूर्ति पूरी तरह सामान्य है और नागरिकों से अनावश्यक खरीद या घबराहट से बचने की अपील की है।












