
दिल्ली की राजनीति एक बार फिर शिक्षा व्यवस्था को लेकर गरमा गई है। सोशल मीडिया पर फैलाई गई उस खबर को लेकर अब कानूनी कार्रवाई शुरू हो गई है, जिसमें दावा किया जा रहा था कि सरकारी स्कूलों के शिक्षकों को आवारा कुत्तों की गिनती का आदेश दिया गया है। इस दावे को पूरी तरह खारिज करते हुए दिल्ली के शिक्षा निदेशालय (Directorate of Education) ने सिविल लाइन्स पुलिस स्टेशन में औपचारिक शिकायत दर्ज कराई है।
मुख्यमंत्री कार्यालय के आधिकारिक बयान के अनुसार, यह खबर न केवल झूठी और मनगढ़ंत है, बल्कि एक सुनियोजित प्रयास भी है, जिसका उद्देश्य समर्पित शिक्षकों का मनोबल कमजोर करना और दिल्ली की शिक्षा व्यवस्था पर जनता का भरोसा डगमगाना है। विभाग का कहना है कि ऐसा कोई आदेश कभी जारी नहीं किया गया और सोशल मीडिया पर फैलाए गए दावे पूरी तरह भ्रामक हैं।
सरकार का कहना है कि इस विवाद की शुरुआत तब हुई जब आम आदमी पार्टी (AAP) के कुछ नेताओं ने नवंबर 2025 के एक सर्कुलर की गलत व्याख्या करते हुए सोशल मीडिया पर दावे किए। विभाग ने स्पष्ट किया कि वह सर्कुलर केवल स्कूल परिसरों में छात्रों की सुरक्षा और सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुपालन से जुड़ा था, न कि कुत्तों की गिनती से।
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के नेतृत्व वाली बीजेपी सरकार ने “झूठ की राजनीति पर जीरो टॉलरेंस” की बात दोहराते हुए कहा है कि दोषियों को कानून के तहत पूरी तरह जवाबदेह ठहराया जाएगा। फिलहाल, पुलिस इस पूरे मामले की जांच कर रही है और जांच के नतीजों का इंतजार किया जा रहा है।














