कोलकाता: पश्चिम बंगाल सरकार ने पशु बलि और वध से जुड़े नियमों को लेकर नई प्रशासनिक गाइडलाइन जारी की है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग की ओर से जारी इस अधिसूचना में स्पष्ट किया गया है कि बिना वैध प्रमाणपत्र के किसी भी पशु की बलि नहीं दी जा सकेगी। राज्य सरकार ने सार्वजनिक स्थानों पर पशु बलि को सख्ती से प्रतिबंधित करने के निर्देश भी दिए हैं।
पूरा मामला क्या है
13 मई 2026 को जारी यह अधिसूचना पश्चिम बंगाल पशु हत्या नियंत्रण अधिनियम, 1950 से संबंधित है। दस्तावेज में बताया गया है कि कोलकाता हाईकोर्ट के पूर्व आदेशों और विभिन्न सरकारी आदेशों के आधार पर यह नई कार्यप्रणाली लागू की जा रही है।
सरकार के अनुसार, अब किसी भी पशु — जैसे गाय, बैल, भैंस, बछड़ा, बकरी या अन्य पशुओं — की बलि केवल तभी दी जा सकेगी जब संबंधित प्रशासनिक इकाई और सरकारी पशु चिकित्सक संयुक्त रूप से प्रमाणित करें कि पशु बलि योग्य स्थिति में है।
निर्देश में यह भी कहा गया है कि यदि पशु वृद्ध हो, गंभीर रूप से घायल हो, स्थायी बीमारी से ग्रस्त हो या कृषि एवं प्रजनन कार्य के लिए अनुपयोगी हो चुका हो, तभी प्रमाणपत्र जारी किया जा सकेगा।
प्रशासन ने क्या कहा
राज्य सरकार के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग ने स्पष्ट किया है कि यह व्यवस्था कानून के पालन और प्रशासनिक निगरानी को मजबूत करने के उद्देश्य से लागू की गई है। अधिसूचना में स्थानीय निकायों, पंचायत समितियों और सरकारी पशु चिकित्सकों की जिम्मेदारी भी तय की गई है।
यदि किसी व्यक्ति को प्रमाणपत्र जारी करने से मना किया जाता है, तो वह 15 दिनों के भीतर राज्य सरकार के समक्ष अपील कर सकता है। प्रशासन ने यह भी कहा है कि नियमों का उल्लंघन करने पर जेल और आर्थिक दंड दोनों लगाए जा सकते हैं।
स्थानीय लोगों पर असर
कोलकाता, हावड़ा और राज्य के अन्य जिलों में यह आदेश सीधे तौर पर उन क्षेत्रों को प्रभावित करेगा जहां पारंपरिक रूप से पशु बलि की प्रथा मौजूद है। स्थानीय प्रशासन को अब निगरानी बढ़ाने और निर्धारित स्थानों के बाहर होने वाली गतिविधियों पर कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं।
ग्रामीण क्षेत्रों में पंचायत स्तर पर भी इस आदेश के पालन की जिम्मेदारी तय की गई है। इससे स्थानीय निकायों पर अतिरिक्त प्रशासनिक दबाव बढ़ सकता है, जबकि पशुपालन और धार्मिक गतिविधियों से जुड़े लोगों को नई प्रक्रिया का पालन करना होगा।
पृष्ठभूमि और कानूनी संदर्भ
पश्चिम बंगाल में पशु बलि और वध को लेकर पहले भी कानूनी विवाद सामने आते रहे हैं। कोलकाता हाईकोर्ट में इस विषय पर दायर याचिकाओं के बाद राज्य सरकार समय-समय पर दिशा-निर्देश जारी करती रही है।
ताजा अधिसूचना में सुप्रीम कोर्ट और कोलकाता हाईकोर्ट के संबंधित फैसलों का भी उल्लेख किया गया है। सरकार ने कहा है कि संबंधित आदेश आधिकारिक वेबसाइट पर उपलब्ध हैं।
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वर्तमान स्थिति और आगे क्या
फिलहाल राज्य सरकार ने सभी स्थानीय प्रशासनिक इकाइयों को निर्देशों का तत्काल पालन सुनिश्चित करने के लिए कहा है। आने वाले दिनों में जिला प्रशासन और नगर निकायों द्वारा अलग-अलग क्षेत्रों में निगरानी और निरीक्षण अभियान चलाए जाने की संभावना है।
सरकार की ओर से यह भी स्पष्ट किया गया है कि नियमों का उल्लंघन करने वाले मामलों में कानूनी कार्रवाई की जाएगी और संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय होगी।
क्या पश्चिम बंगाल में पशु बलि पूरी तरह प्रतिबंधित कर दी गई है?
नहीं। अधिसूचना के अनुसार केवल बिना प्रमाणपत्र और सार्वजनिक स्थानों पर पशु बलि पर रोक लगाई गई है। निर्धारित प्रक्रिया और अधिकृत स्थानों पर अनुमति दी जा सकती है।
प्रमाणपत्र कौन जारी करेगा?
स्थानीय निकाय के प्रतिनिधि और सरकारी पशु चिकित्सक संयुक्त रूप से पशु की स्थिति का परीक्षण करने के बाद प्रमाणपत्र जारी करेंगे।
नियम तोड़ने पर क्या कार्रवाई हो सकती है?
अधिसूचना के अनुसार नियमों के उल्लंघन पर छह महीने तक की जेल, जुर्माना या दोनों दंड लगाए जा सकते हैं।
क्या यह आदेश पूरे पश्चिम बंगाल में लागू होगा?
हाँ। यह निर्देश राज्य के सभी जिलों, नगर निकायों और पंचायत क्षेत्रों पर लागू माना जाएगा।









