उत्तर प्रदेश में शहद उत्पादन और मधुमक्खी पालन को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजार से जोड़ने की दिशा में नई पहल तेज होती दिखाई दे रही है। राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार)दिनेश प्रताप सिंह ने अपने सरकारी आवास पर न्यूजीलैंड से आए प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात कर तकनीकी सहयोग, निर्यात और किसानों को आधुनिक जानकारी उपलब्ध कराने पर चर्चा की। इस पहल का सीधा असर रायबरेली, बाराबंकी और आसपास के मधुमक्खी पालकों पर पड़ सकता है।
बैठक के दौरान प्रतिनिधिमंडल ने रायबरेली स्थित निर्माणाधीन शहद उत्कृष्टता केंद्र और बाराबंकी के मधुमक्खी पालन क्षेत्रों के निरीक्षण का अनुभव साझा किया। अधिकारियों के अनुसार, यह परियोजना प्रदेश में शहद उत्पादन की गुणवत्ता सुधारने और स्थानीय उत्पादकों को बड़े बाजारों से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
गुरुवार को रायबरेली जिले की नगर पंचायत शिवगढ़ में निर्माणाधीन सेंटर ऑफ एक्सीलेंस का न्यूजीलैंड और एपीडा के प्रतिनिधिमंडल ने निरीक्षण किया। उद्यान विभाग द्वारा हाईटेक वेजिटेबल सीडलिंग प्रोडक्शन इकाई के पास तैयार हो रहा यह केंद्र अंतिम चरण में बताया जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि केंद्र शुरू होने के बाद स्थानीय शहद उत्पादकों को तकनीकी प्रशिक्षण, प्रोसेसिंग और विपणन में सहायता मिलेगी।
प्रतिनिधिमंडल ने बताया कि भारत की ओर से एपीडा और न्यूजीलैंड मिलकर “हनी एक्शन प्लान” पर कार्य कर रहे हैं। इसका उद्देश्य आधुनिक तकनीक, गुणवत्ता नियंत्रण और बेहतर बाजार व्यवस्था के जरिए मधुमक्खी पालन को मजबूत बनाना है। इससे छोटे और मध्यम स्तर के उत्पादकों को भी अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंच बनाने में मदद मिल सकती है।
बैठक और निरीक्षण कार्यक्रम में न्यूजीलैंड के एशन जयवर्धने (Ministry for Primary Industries, New Zealand), कृषि सलाहकार मेलानी फिलिप्स, मधुमक्खी पालन तकनीकी सलाहकार बायरन टेलर, न्यूजीलैंड उच्चायोग के कृषि भागीदारी प्रबंधक प्रियम अरोरा, एपीडा के क्षेत्रीय ट्रेड अधिकारी संदीप साहा तथा शहद उत्पादक निमित्त सिंह मौजूद रहे।
विशेषज्ञों के अनुसार, उत्तर प्रदेश में प्राकृतिक शहद उत्पादन की अच्छी संभावनाएं हैं। यदि गुणवत्ता और पैकेजिंग को अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप विकसित किया जाए तो रायबरेली और बाराबंकी जैसे जिलों का शहद विदेशों में नई पहचान बना सकता है। इससे किसानों की आय बढ़ने के साथ ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसर भी बढ़ सकते हैं।
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रायबरेली का शहद उत्कृष्टता केंद्र क्यों महत्वपूर्ण माना जा रहा है?
इस केंद्र के जरिए स्थानीय मधुमक्खी पालकों को आधुनिक तकनीक, गुणवत्ता जांच और बाजार से जुड़ी सुविधाएं मिलने की उम्मीद है, जिससे शहद उत्पादन और बिक्री दोनों को बढ़ावा मिल सकता है।
“हनी एक्शन प्लान” का मुख्य उद्देश्य क्या है?
इस योजना का उद्देश्य भारत और न्यूजीलैंड के बीच तकनीकी सहयोग बढ़ाकर मधुमक्खी पालन क्षेत्र को आधुनिक बनाना और शहद को बड़े बाजारों तक पहुंचाना है।
स्थानीय किसानों को इस परियोजना से क्या लाभ मिल सकता है?
विशेषज्ञों के अनुसार, बेहतर प्रशिक्षण, गुणवत्ता सुधार और निर्यात अवसर मिलने से किसानों और मधुमक्खी पालकों की आय में वृद्धि हो सकती है।











