सी. जोसेफ विजय के मुख्यमंत्री बनने के बाद 11 मई से तमिलनाडु विधानसभा सत्र, सभी नवनिर्वाचित विधायक लेंगे शपथ

चेन्नई, तमिलनाडु | 10 मई 2026
तमिलनाडु विधानसभा के पहले सत्र को लेकर जारी आधिकारिक प्रेस विज्ञप्ति
तमिलनाडु विधानसभा सचिवालय ने पहले सत्र और स्पीकर चुनाव का कार्यक्रम जारी किया।

तमिलनाडु विधानसभा सत्र 2026 11 मई से शुरू होने जा रहा है। मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय के शपथ ग्रहण के बाद सभी नवनिर्वाचित विधायक विधानसभा में शपथ लेंगे। तमिलनाडु में नई सरकार के गठन के बाद अब राजनीतिक गतिविधियां विधानसभा की ओर बढ़ गई हैं। 12 मई को स्पीकर और डिप्टी स्पीकर का चुनाव कराया जाएगा। राज्य की राजनीति में अब सबसे ज्यादा नजर संभावित बहुमत परीक्षण और नई सरकार की स्थिरता पर बनी हुई है।

तमिलनाडु विधानसभा सचिवालय की ओर से जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार पहला सत्र चेन्नई स्थित विधानसभा भवन में आयोजित होगा। सभी विधायकों को अपना निर्वाचन प्रमाणपत्र साथ लाने के निर्देश दिए गए हैं ताकि शपथ ग्रहण प्रक्रिया सुचारु रूप से पूरी की जा सके।

हालिया विधानसभा चुनाव में सी. जोसेफ विजय की पार्टी तमिझगा वेत्री कझगम (TVK) सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी, लेकिन उसे पूर्ण बहुमत से कुछ सीटें कम मिलीं। इसके बाद सरकार गठन के लिए अन्य दलों और निर्दलीय विधायकों के समर्थन की जरूरत पड़ी। राजनीतिक घटनाक्रम के बाद राज्यपाल ने विजय को सरकार बनाने का आमंत्रण दिया और उन्होंने मुख्यमंत्री पद की शपथ ली।

तमिलनाडु की 234 सदस्यीय विधानसभा में बहुमत के लिए 118 विधायकों का समर्थन जरूरी माना जाता है।

राजनीतिक जानकारों का कहना है कि नई सरकार को आने वाले दिनों में विधानसभा में बहुमत सिद्ध करना पड़ सकता है। भारतीय संसदीय परंपरा के अनुसार जब किसी सरकार के पास स्पष्ट बहुमत नहीं होता, तब सदन के पटल पर शक्ति परीक्षण यानी फ्लोर टेस्ट कराया जा सकता है। इसी वजह से 11 मई से शुरू हो रहा विधानसभा सत्र राजनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

12 मई को होने वाला स्पीकर चुनाव भी महत्वपूर्ण रहेगा क्योंकि विधानसभा की कार्यवाही का संचालन स्पीकर ही करता है। सदन में किस मुद्दे पर चर्चा होगी, कौन सदस्य कब बोलेगा और मतदान प्रक्रिया कैसे होगी, यह सब स्पीकर की निगरानी में होता है। किसी संवैधानिक या प्रक्रिया संबंधी विवाद में स्पीकर की भूमिका निर्णायक मानी जाती है।

तमिलनाडु की राजनीति में यह बदलाव इसलिए भी अहम माना जा रहा है क्योंकि पिछले कई दशकों से राज्य की राजनीति मुख्य रूप से DMK और AIADMK के इर्द-गिर्द घूमती रही है। इस बार चुनाव परिणामों ने पारंपरिक राजनीतिक समीकरणों को बदल दिया है और पहली बार पोस्ट-पोल गठबंधन की स्थिति बनी है।

चेन्नई में विधानसभा सत्र को देखते हुए सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। विधानसभा परिसर और आसपास के इलाकों में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है। प्रशासन ने ट्रैफिक प्रबंधन को लेकर भी विशेष योजना तैयार की है ताकि आम लोगों को कम से कम परेशानी हो।

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तमिलनाडु में बहुमत परीक्षण क्यों चर्चा में है?

नई सरकार स्पष्ट बहुमत के आंकड़े से नीचे रही थी, इसलिए विपक्ष और राजनीतिक विश्लेषकों की नजर इस बात पर है कि सरकार विधानसभा में अपना समर्थन कैसे साबित करती है। फ्लोर टेस्ट की स्थिति बनने पर सभी सहयोगी दलों का समर्थन महत्वपूर्ण होगा।

स्पीकर चुनाव को राजनीतिक रूप से अहम क्यों माना जाता है?

स्पीकर विधानसभा की कार्यवाही संचालित करता है और सदन में अनुशासन बनाए रखने की जिम्मेदारी निभाता है। किसी विवाद की स्थिति में उसका फैसला महत्वपूर्ण माना जाता है। इसलिए सरकार और विपक्ष दोनों के लिए यह चुनाव रणनीतिक महत्व रखता है।

सी. जोसेफ विजय की सरकार से लोगों की क्या अपेक्षाएं हैं?

युवाओं, रोजगार, उद्योग निवेश और सामाजिक योजनाओं को लेकर लोगों की अपेक्षाएं बढ़ी हैं। चुनाव प्रचार के दौरान पारदर्शिता और प्रशासनिक सुधारों के जो वादे किए गए थे, अब उन पर अमल को लेकर जनता की नजर बनी हुई है।

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