नई दिल्ली: भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने देश में मौसम पूर्वानुमान व्यवस्था को आधुनिक बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए AI आधारित नई मौसम पूर्वानुमान प्रणाली लॉन्च की है। इस पहल के तहत हाइपर-लोकल वेदर फोरकास्ट, 10 दिन पहले तक मौसम की जानकारी और उत्तर प्रदेश के लिए 1 किलोमीटर रिजॉल्यूशन वाला वर्षा पूर्वानुमान मॉडल शुरू किया गया है। केंद्र सरकार का कहना है कि इससे कृषि, आपदा प्रबंधन और आम नागरिकों को समय रहते मौसम संबंधी सटीक जानकारी मिल सकेगी।
पूरा मामला क्या है
केंद्र सरकार और IMD ने मंगलवार को Artificial Intelligence आधारित कई नई मौसम सेवाओं का औपचारिक शुभारंभ किया। इस नई प्रणाली का उद्देश्य स्थानीय स्तर तक अधिक सटीक और तेज मौसम पूर्वानुमान उपलब्ध कराना है।
सरकार के अनुसार, नई तकनीक के जरिए अब कई क्षेत्रों में गांव और उप-जिला स्तर तक मौसम की जानकारी उपलब्ध कराई जाएगी। शुरुआती चरण में 16 राज्यों और 3000 से अधिक उप-जिलों को AI आधारित मानसून पूर्वानुमान प्लेटफॉर्म से जोड़ा गया है।
इसके साथ ही उत्तर प्रदेश में पायलट प्रोजेक्ट के रूप में 1KM Resolution Rainfall Forecast System शुरू किया गया है। यह मॉडल कम क्षेत्र में होने वाली भारी बारिश, आंधी और तेज मौसम बदलाव की अधिक सटीक जानकारी देने में मदद करेगा।
मिशन मौसम और तकनीकी विस्तार
केंद्र सरकार द्वारा शुरू किए गए “मिशन मौसम” का उद्देश्य देश की मौसम निगरानी क्षमता को मजबूत करना है। इसके तहत नए डॉप्लर मौसम रडार, हाई-रिजॉल्यूशन मॉडल और AI आधारित डेटा विश्लेषण प्रणाली विकसित की जा रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि भारत जैसे विशाल और विविध जलवायु वाले देश में सटीक मौसम पूर्वानुमान कृषि उत्पादन, विमानन, रेलवे, शहरी प्रबंधन और आपदा नियंत्रण के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
स्थानीय लोगों पर क्या असर पड़ेगा
उत्तर प्रदेश सहित कई राज्यों में किसानों को इस नई प्रणाली से सीधा लाभ मिलने की संभावना है। समय पर बारिश, गर्मी, आंधी और ओलावृष्टि की जानकारी मिलने से फसल प्रबंधन बेहतर किया जा सकेगा।
इसके अलावा, शहरी क्षेत्रों में अचानक होने वाले जलभराव और तेज बारिश जैसी स्थितियों से निपटने में स्थानीय प्रशासन को पहले से तैयारी करने में मदद मिलेगी। आपदा प्रबंधन एजेंसियों को भी रियल-टाइम डेटा उपलब्ध कराया जाएगा।
विशेष रूप से पूर्वी उत्तर प्रदेश, बुंदेलखंड और बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में मौसम आधारित चेतावनी प्रणाली को अधिक प्रभावी बनाने पर जोर दिया जा रहा है।
प्रशासन की प्रतिक्रिया
सरकारी अधिकारियों ने कहा कि आने वाले समय में AI आधारित यह प्रणाली देश के अन्य राज्यों तक भी विस्तारित की जाएगी। मौसम विभाग ने दावा किया है कि नई तकनीक के जरिए 10 दिन पहले तक स्थानीय मौसम पूर्वानुमान देने की क्षमता विकसित की जा रही है।
मौसम विभाग के अनुसार, AI मॉडल बड़ी मात्रा में पुराने और वर्तमान मौसम डेटा का विश्लेषण कर तेजी से परिणाम तैयार करते हैं, जिससे पूर्वानुमान की सटीकता में सुधार हो सकता है।
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AI आधारित मौसम पूर्वानुमान प्रणाली क्या है?
यह ऐसी तकनीक है जिसमें Artificial Intelligence और डेटा एनालिटिक्स की मदद से मौसम संबंधी जानकारी का तेजी से विश्लेषण कर अधिक सटीक पूर्वानुमान तैयार किया जाता है।
उत्तर प्रदेश में शुरू किए गए 1KM रेनफॉल फोरकास्ट का क्या मतलब है?
इस प्रणाली के जरिए 1 किलोमीटर क्षेत्र तक के स्तर पर वर्षा का अनुमान लगाया जा सकेगा, जिससे स्थानीय मौसम चेतावनी अधिक सटीक हो सकती है।
मिशन मौसम योजना का उद्देश्य क्या है?
मिशन मौसम का उद्देश्य भारत की मौसम निगरानी और पूर्वानुमान क्षमता को मजबूत करना है। इसके तहत नए मौसम रडार और आधुनिक तकनीकी सिस्टम स्थापित किए जा रहे हैं।
इस नई प्रणाली से आम लोगों को क्या फायदा होगा?
किसानों, यात्रियों, आपदा प्रबंधन एजेंसियों और शहरी प्रशासन को समय रहते मौसम संबंधी जानकारी मिलेगी, जिससे नुकसान कम करने और बेहतर तैयारी में मदद मिल सकती है।














