रबी सीजन में सरसों की खेती कर रहे किसानों के लिए कृषि विशेषज्ञों ने जरूरी चेतावनी जारी की है। विशेषज्ञों के अनुसार, सरसों की फसल में आवश्यकता से अधिक सिंचाई करना नुकसानदायक हो सकता है। खेत में अधिक समय तक नमी बनी रहने से पौधों में तना गलन रोग की समस्या उत्पन्न हो जाती है, जिससे तना कमजोर होकर सड़ने लगता है और कई बार पौधा टूट भी जाता है। इसका सीधा प्रभाव फसल की गुणवत्ता और उपज पर पड़ता है।
कृषि विभाग के अनुसार, वर्तमान समय में कई क्षेत्रों से सरसों की फसल में सफेद रतवा (White Rust) रोग के लक्षण भी सामने आ रहे हैं। इस रोग में पत्तियों की निचली सतह पर सफेद फफोले जैसे दाने दिखाई देते हैं। अधिक नमी इस रोग के फैलाव को और तेज कर देती है, जिससे पौधों की बढ़वार रुक जाती है और दाने के विकास पर प्रतिकूल असर पड़ता है।
कृषि विशेषज्ञों ने किसानों को सलाह दी है कि वे खेत में अनावश्यक सिंचाई से बचें और मिट्टी की नमी की स्थिति देखकर ही पानी दें। यदि फसल में सफेद रतवा के लक्षण दिखाई दें, तो रोग के नियंत्रण के लिए Mancozeb (M-45) का अनुशंसित मात्रा में तुरंत छिड़काव करें। समय पर उपचार और नियमित निगरानी से सरसों की फसल को सुरक्षित रखा जा सकता है और संभावित नुकसान को काफी हद तक कम किया जा सकता है।







