रायबरेली में गो संरक्षण पर बड़ा एक्शन, गौशालाओं को आत्मनिर्भर बनाने का प्लान तैयार
खबर एक नजर में
| क्रमांक | मुख्य बिंदु |
|---|---|
| 1 | रायबरेली में गो संरक्षण समिति की बैठक में गौशालाओं की व्यवस्थाओं की समीक्षा की गई और सुधार के निर्देश दिए गए। |
| 2 | गेहूं कटाई के बाद सस्ते भूसे का लाभ उठाकर सभी गौशालाओं में छह माह का भंडारण सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया। |
| 3 | गोचर भूमि के उपयोग और किसानों के सहयोग से हरे चारे की उपलब्धता बढ़ाने की योजना बनाई गई। |
| 4 | गर्मी से बचाव के लिए गौशालाओं में पेयजल, पंखे, जूट पर्दे और पानी के छिड़काव की व्यवस्था अनिवार्य की गई। |
| 5 | बीमार गोवंशों के लिए अलग वार्ड, चिकित्सा निगरानी, स्वच्छता और CCTV जैसी व्यवस्थाओं को मजबूत करने के निर्देश दिए गए। |
| 6 | वर्मीकम्पोस्ट, साइलेज और बायोगैस संयंत्रों के माध्यम से गौशालाओं को आत्मनिर्भर बनाने पर विशेष जोर दिया गया। |
विस्तृत खबर
उ0प्र0 गो सेवा आयोग के मा० उपाध्यक्ष अतुल सिंह की अध्यक्षता में गो संरक्षण अनुश्रवण एवं मूल्यांकन समिति की समीक्षा बैठक विकास भवन स्थित महात्मा गांधी सभागार में आयोजित की गई। बैठक में जनपद की गौशालाओं के संचालन, प्रबंधन एवं संसाधनों की उपलब्धता पर विस्तार से चर्चा की गई।
बैठक के दौरान निर्देश दिए गए कि गेहूं कटाई के बाद उपलब्ध सस्ते भूसे का लाभ उठाते हुए सभी गौशालाओं में कम से कम छह माह का भंडारण सुनिश्चित किया जाए। इसके साथ ही गोचर भूमि का उपयोग बढ़ाकर हरे चारे की निरंतर उपलब्धता बनाए रखने पर भी जोर दिया गया।
अधिकारियों को निर्देशित किया गया कि किसानों के साथ समन्वय स्थापित कर विकास खंड स्तर पर गोष्ठियों का आयोजन किया जाए, जिससे गो आधारित खेती को बढ़ावा मिल सके। साथ ही ग्रीष्मकाल को देखते हुए गौशालाओं में पेयजल, पंखे, जूट पर्दे एवं पानी के छिड़काव जैसी व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने को कहा गया।
बैठक में बीमार गोवंशों के लिए पृथक सिक वार्ड, नियमित चिकित्सा निगरानी तथा गौशालाओं में स्वच्छता, CCTV निगरानी एवं विद्युत व्यवस्था को मजबूत करने के निर्देश दिए गए। गोबर और गोमूत्र आधारित उत्पादों के माध्यम से प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने पर भी बल दिया गया।
मा० उपाध्यक्ष द्वारा जनपद के विभिन्न गो आश्रय स्थलों का निरीक्षण भी किया गया, जिसमें कान्हा गोवंश विहार त्रिपुला, लोधवारी आश्रय स्थल तथा बेलखारा स्थित वृहद गो आश्रय केंद्र शामिल रहे। निरीक्षण के दौरान व्यवस्थाओं को और प्रभावी बनाने के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए।
निरीक्षण में कई स्थानों पर वर्मीकम्पोस्ट, हरे चारे की खेती और वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों का उपयोग पाया गया। अधिकारियों को इन पहलों को और विस्तारित करने तथा पेयजल और चारे की उपलब्धता को बेहतर बनाने के निर्देश दिए गए।
वृहद गो आश्रय केंद्रों में साइलेज तकनीक और बायोगैस संयंत्रों के उपयोग को बढ़ावा देने की बात कही गई, जिससे गौशालाओं को आत्मनिर्भर बनाया जा सके। बैठक में विभिन्न विभागों के अधिकारी, प्रधान एवं संबंधित कर्मचारी उपस्थित रहे।












