जयप्रकाश एसोसिएट्स बोली विवाद: अनिल अग्रवाल का बयान, गीता के संदेश से जोड़ा दृष्टिकोण
वेदांता समूह के चेयरमैन अनिल अग्रवाल ने हाल ही में एक सार्वजनिक पोस्ट में एक औद्योगिक परिसंपत्ति की नीलामी प्रक्रिया से जुड़े अपने अनुभव साझा किए। उन्होंने अपने वक्तव्य में भगवद गीता के सिद्धांतों का उल्लेख करते हुए कर्तव्य, धैर्य और निष्पक्षता पर जोर दिया।
अग्रवाल ने लिखा, “आज सुबह मैं भगवद गीता के अध्याय 15 को पढ़ रहा था। एक विचार मन में रहा—साहस रखें, विनम्र रहें और बिना आसक्ति के अपना कर्तव्य निभाएं। जीवन ने इसकी परीक्षा भी ली।”
उन्होंने बताया कि कुछ समय पहले जयप्रकाश समूह के संस्थापक जयप्रकाश गौर के साथ लंदन में उनकी मुलाकात हुई थी, जिसमें परिसंपत्तियों को आगे बढ़ाने को लेकर चर्चा हुई थी।
अग्रवाल के अनुसार, संबंधित परिसंपत्ति बाद में IBC (Insolvency and Bankruptcy Code) प्रक्रिया के तहत नीलामी में लाई गई। इस प्रक्रिया में कई कंपनियों ने भाग लिया और वेदांता को उच्चतम बोलीदाता घोषित किया गया। कंपनी को लिखित रूप से इसकी सूचना भी दी गई थी।
अपने पोस्ट के साथ अग्रवाल ने एक मीडिया रिपोर्ट का स्क्रीनशॉट भी साझा किया, जिसमें वेदांता द्वारा लगभग 17,000 करोड़ रुपये की बोली का उल्लेख किया गया था।
अग्रवाल ने बताया कि नीलामी प्रक्रिया के बाद स्थिति में बदलाव आया, हालांकि उन्होंने इस विषय में विस्तृत जानकारी साझा नहीं की और कहा कि इस मामले को उचित मंच पर रखा जाएगा।
उन्होंने अपने संदेश में सत्य, प्रतिबद्धता और निष्पक्षता को किसी भी प्रक्रिया का महत्वपूर्ण आधार बताया।
अग्रवाल ने अपने वक्तव्य में आगे कहा, “तो ऐसे में क्या करना चाहिए? गीता इसका सरल उत्तर देती है—साहस के साथ, लेकिन बिना क्रोध और बिना आसक्ति के अपना कर्तव्य निभाएं। हम भी यही करेंगे। हम तथ्यों को सही तरीके से प्रस्तुत करेंगे और सही मार्ग का पालन करेंगे।”
“बाकी सब मैं भगवान पर छोड़ता हूं।”













