सर्दियों में पैरों की उँगलियों की यह परेशानी मामूली नहीं: चिलब्लेन्स को नजरअंदाज करना पड़ सकता है भारी
जैसे ही तापमान गिरता है, देश के कई हिस्सों से एक जैसी शिकायतें सामने आने लगती हैं। किसी की पैरों की उँगलियाँ लाल हो जाती हैं, किसी को असहनीय खुजली सताने लगती है, तो किसी के लिए चलना तक मुश्किल हो जाता है। अधिकतर लोग इसे सामान्य सर्दी, एलर्जी या फंगल इंफेक्शन मानकर घरेलू उपाय या मनपसंद क्रीम लगाना शुरू कर देते हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, यह लापरवाही आगे चलकर गंभीर परेशानी का कारण बन सकती है। इन लक्षणों के पीछे एक आम लेकिन कम पहचानी जाने वाली स्थिति होती है, जिसे चिलब्लेन्स (Chilblains / Perniosis) कहा जाता है।
डॉक्टर बताते हैं कि चिलब्लेन्स के मरीज अक्सर यह कहते हैं कि दिन में तो किसी तरह काम चल जाता है, लेकिन रात में रजाई के अंदर खुजली और जलन अचानक बढ़ जाती है। कई मामलों में धूप या हल्की गरमी में भी आराम मिलने के बजाय परेशानी और बढ़ जाती है। यही वजह है कि यह समस्या धीरे-धीरे व्यक्ति की दिनचर्या और नींद दोनों को प्रभावित करने लगती है।
क्या है चिलब्लेन्स और क्यों होती है?
चिलब्लेन्स ठंड से जुड़ी एक स्थिति है, जो तब होती है जब शरीर के खुले हिस्सों, खासतौर पर पैरों की उँगलियों में, रक्तसंचार ठीक से नहीं हो पाता। ठंड के संपर्क में रहने के बाद अचानक गरमी मिलने पर छोटी-छोटी रक्त नलिकाएँ सामान्य तरीके से प्रतिक्रिया नहीं कर पातीं। इसका नतीजा सूजन, लालिमा, खुजली और दर्द के रूप में सामने आता है।
विशेषज्ञों के अनुसार, यह समस्या खासतौर पर उन इलाकों में ज्यादा देखी जाती है जहाँ सर्दी के मौसम में नमी रहती है। लंबे समय तक गीले मोज़े पहनना, टाइट जूते या पैरों को सही ढंग से ढककर न रखना भी जोखिम को बढ़ा देता है।
ये लक्षण दिखें तो सावधान हो जाना चाहिए
- सर्दियों में पैरों की उँगलियों का लाल या बैंगनी पड़ जाना
- गरमी मिलने पर खुजली और जलन का बढ़ जाना
- उँगलियों में सूजन और दबाने पर दर्द
- चलने-फिरने में तकलीफ महसूस होना
- गंभीर मामलों में छाले या त्वचा का फटना
किन लोगों में खतरा ज्यादा रहता है?
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक, कुछ लोगों में चिलब्लेन्स की आशंका दूसरों की तुलना में अधिक होती है। इनमें खून की कमी से जूझ रहे लोग, मधुमेह या थायरॉइड के मरीज, बहुत दुबले-पतले शरीर वाले व्यक्ति और वे लोग शामिल हैं, जो काम के सिलसिले में लंबे समय तक ठंड के संपर्क में रहते हैं।
इलाज को लेकर क्या कहते हैं डॉक्टर?
इलाज पूरी तरह मरीज के लक्षणों और समस्या की गंभीरता पर निर्भर करता है। कई मामलों में डॉक्टर होम्योपैथिक और बायोकेमिक पद्धति पर भी विचार करते हैं। इनमें Agaricus Muscarius, Petroleum, Rhus Toxicodendron जैसी होम्योपैथिक दवाओं के साथ-साथ Ferrum Phosphoricum, Natrum Muriaticum और Calcarea Fluorica जैसी बायोकेमिक दवाओं का उल्लेख किया जाता है।
दवा के साथ सावधानी क्यों जरूरी?
डॉक्टरों का कहना है कि केवल दवा लेना ही काफी नहीं होता। अगर व्यक्ति बार-बार बहुत गरम पानी में पैर डालता है, हीटर या अलाव के सामने सीधे पैर सेंकता है, या गीले मोज़े पहनता है, तो दवा का असर भी कम हो सकता है। इसलिए इलाज के साथ-साथ सही देखभाल उतनी ही जरूरी मानी जाती है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, यदि उँगलियों में घाव बनने लगें, रंग नीला या काला पड़ने लगे, या 10–15 दिन में भी लक्षणों में सुधार न दिखे, तो इसे हल्के में लेने के बजाय तुरंत चिकित्सकीय सलाह लेना जरूरी है। सर्दियों में पैरों की अनदेखी धीरे-धीरे एक बड़ी परेशानी का रूप ले सकती है, जिससे बचाव समय पर ध्यान देने से ही संभव है।














