महिला आरक्षण पर नया फॉर्मूला फेल: संविधान 131वां संशोधन विधेयक, 2026 पास नहीं हुआ
खबर एक नजर में
| वर्ष/तारीख | मुख्य घटनाक्रम |
|---|---|
| 2023 | नारी शक्ति वंदन अधिनियम पारित, लोकसभा/विधानसभाओं में 33% महिला आरक्षण का प्रावधान |
| 2023–2025 | कानून में शर्त: आरक्षण लागू करने से पहले नई जनगणना और परिसीमन आवश्यक |
| 16 अप्रैल 2026 | सरकार ने 3 बिल पेश किए — संविधान (131वां संशोधन) विधेयक (सीट 543→~850, 2011 डेटा पर परिसीमन, 2029 से आरक्षण का मार्ग), परिसीमन विधेयक (नया आयोग, 2011 आधार, 2002 कानून समाप्त) और केंद्र शासित प्रदेश संशोधन विधेयक (दिल्ली, जम्मू-कश्मीर, पुडुचेरी में आरक्षण) |
| 17 अप्रैल 2026 | लोकसभा वोटिंग: 298 पक्ष, 230 विरोध — दो-तिहाई बहुमत न मिलने से संशोधन बिल पास नहीं हुआ |
| 2026 (सरकार का पक्ष) | अमित शाह: परिसीमन लंबा; 2029 से पहले लागू करने के लिए सीट बढ़ाने/तेज विकल्प जरूरी |
| 2026 (विपक्ष का पक्ष) | राहुल गांधी व INDIA गठबंधन: यह कदम राजनीतिक संरचना/चुनावी नक्शा बदलने का प्रयास; 543 सीटों पर सीधे लागू करने की मांग |
| 2026 (विवाद का मुद्दा) | 2011 डेटा पर परिसीमन से दक्षिणी राज्यों, छोटे राज्यों और OBC/SC-ST प्रतिनिधित्व प्रभावित होने की आशंका |
| वर्तमान स्थिति | 2023 का कानून लागू, पर परिसीमन का इंतजार जारी; 2026 का संशोधन पैकेज फेल, सरकार विकल्प तलाश रही और विपक्ष 543 सीटों पर तुरंत लागू करने पर जोर |
विस्तृत खबर
महिला आरक्षण को लेकर केंद्र सरकार द्वारा लाया गया 2026 का संशोधन पैकेज संसद में पारित नहीं हो सका है, जिससे इसके तत्काल क्रियान्वयन को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं हो पाई है। नारी शक्ति वंदन अधिनियम, जिसे 2023 में पारित किया गया था, अभी भी लागू होने के लिए प्रक्रियात्मक शर्तों पर निर्भर बना हुआ है।
सरकार ने 16 अप्रैल 2026 को तीन विधेयक पेश किए थे, जिनमें लोकसभा सीटों को 543 से बढ़ाकर लगभग 850 करने, 2011 जनगणना के आधार पर परिसीमन करने और महिला आरक्षण को 2029 के चुनाव से लागू करने का प्रस्ताव शामिल था।
17 अप्रैल 2026 को लोकसभा में इस पर मतदान हुआ, जिसमें 298 सदस्यों ने समर्थन किया जबकि 230 सदस्यों ने विरोध किया। संविधान संशोधन के लिए आवश्यक दो-तिहाई बहुमत नहीं मिलने के कारण यह बिल पास नहीं हो सका और गिर गया।
केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने कहा कि परिसीमन आयोग के नियमों के तहत प्रत्येक निर्वाचन क्षेत्र में सार्वजनिक सुनवाई करना आवश्यक होता है। उन्होंने बताया कि 2026 से 2029 के बीच सभी 543 सीटों पर यह प्रक्रिया पूरी करना संभव नहीं है, जबकि 2027 तक नई जनगणना के आंकड़े भी उपलब्ध नहीं होंगे।
उन्होंने यह तर्क रखा कि यदि महिला आरक्षण को 2029 के चुनाव से पहले लागू करना है, तो सीटों की संख्या बढ़ाने जैसे विकल्पों पर विचार करना होगा, ताकि लंबी परिसीमन प्रक्रिया के बिना भी आरक्षण लागू किया जा सके।
वहीं, कांग्रेस और INDIA गठबंधन ने इस प्रस्ताव का विरोध करते हुए कहा है कि यह पहल केवल महिला सशक्तिकरण तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे देश की चुनावी संरचना प्रभावित हो सकती है। विपक्ष का यह भी कहना है कि 2011 के आंकड़ों पर परिसीमन करने से दक्षिणी राज्यों, छोटे राज्यों और OBC तथा SC/ST समुदायों के प्रतिनिधित्व पर असर पड़ सकता है।
वर्तमान स्थिति में महिला आरक्षण कानून लागू तो है, लेकिन इसका क्रियान्वयन अभी भी लंबित है। 2026 का संशोधन बिल पारित नहीं होने के कारण सरकार और विपक्ष के बीच इस मुद्दे पर सहमति बनना अभी बाकी है।









