रायबरेली जिला न्यायालय परिसर में आयोजित राष्ट्रीय लोक अदालत में शनिवार को कुल 1,92,968 मामलों का निस्तारण किया गया। लोक अदालत में बैंक ऋण, ई-चालान, चेक बाउंस, वैवाहिक विवाद और प्री-लिटिगेशन मामलों समेत विभिन्न श्रेणी के मुकदमों का आपसी समझौते के आधार पर निपटारा हुआ। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के अनुसार कुल समझौता राशि ₹11 करोड़ से अधिक रही।
राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण और उत्तर प्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, लखनऊ के निर्देश पर आयोजित इस कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रभारी जनपद न्यायाधीश कुशल पाल ने की। लोक अदालत का उद्देश्य लंबित मुकदमों का त्वरित निस्तारण कर आमजन को सुलभ और कम खर्च में न्याय उपलब्ध कराना रहा।
कार्यक्रम में प्रधान न्यायाधीश परिवार न्यायालय भूपेन्द्र राय, मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण के चेयरमैन प्रफुल्ल कमल, अपर प्रधान न्यायाधीश सुशील कुमार वर्मा, विशेष न्यायाधीश एससी/एसटी अनिल कुमार पंचम, अपर जिला जज एवं नोडल अधिकारी लोक अदालत प्रतिमा, अपर जिला जज अमित कुमार पाण्डेय और मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट पवन कुमार सिंह सहित कई न्यायिक अधिकारी उपस्थित रहे। इसके अलावा विभिन्न बैंकों और फाइनेंस कंपनियों के अधिकारी भी मौजूद रहे।
जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की सचिव अनिशा ने बताया कि बड़ी संख्या में मामलों का मौके पर ही समझौते के आधार पर समाधान कराया गया। विशेष रूप से बैंक और फाइनेंस कंपनियों के प्री-लिटिगेशन मामलों को आपसी सहमति से निपटाया गया, जिससे पक्षकारों को लंबी न्यायिक प्रक्रिया से राहत मिली।
लोक अदालत में ई-चालान, एनआई एक्ट यानी चेक बाउंस मामलों और वैवाहिक विवादों की संख्या अधिक रही। कई ऐसे दंपत्तियों का भी समझौता कराया गया जो तलाक की स्थिति तक पहुंच चुके थे। न्यायिक अधिकारियों ने सुलह-समझौते के माध्यम से उन्हें दोबारा साथ रहने के लिए प्रेरित किया।
लोक अदालत की अवधारणा भारत में वैकल्पिक विवाद निस्तारण प्रणाली के रूप में विकसित की गई थी। इसे कानूनी सेवा प्राधिकरण अधिनियम 1987 के तहत औपचारिक रूप दिया गया। इसका उद्देश्य ऐसे मामलों का त्वरित समाधान करना है जिन्हें आपसी सहमति से निपटाया जा सकता है। लोक अदालतों में दिए गए फैसले को सिविल कोर्ट के आदेश के समान मान्यता प्राप्त होती है।
रायबरेली दीवानी न्यायालय परिसर में इस अवसर पर जिला कारागार के बंदियों द्वारा तैयार उत्पादों की प्रदर्शनी भी लगाई गई। स्वास्थ्य विभाग, दिव्यांगजन विभाग और एक जिला एक उत्पाद (ODOP) योजना से जुड़े स्टॉल भी लोगों के आकर्षण का केंद्र रहे। आमजन की सुविधा के लिए न्यायालय परिसर में कई हेल्प डेस्क और सहायता केंद्र बनाए गए थे।
कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, लोक अदालतों के माध्यम से छोटे और समझौता योग्य मामलों का त्वरित निपटारा होने से नियमित अदालतों पर लंबित मामलों का दबाव कम होता है। उत्तर प्रदेश के कई जिलों में इस तरह के आयोजन लगातार किए जा रहे हैं, जिससे आम लोगों को कम समय और कम खर्च में न्याय मिलने का रास्ता आसान हो रहा है।
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राष्ट्रीय लोक अदालत में किस प्रकार के मामलों का निस्तारण किया गया?
लोक अदालत में ई-चालान, बैंक ऋण, चेक बाउंस, मोटर दुर्घटना दावा, प्री-लिटिगेशन और वैवाहिक विवाद जैसे मामलों का आपसी समझौते के आधार पर निस्तारण किया गया।
लोक अदालत का उद्देश्य क्या होता है?
लोक अदालत का मुख्य उद्देश्य लोगों को कम खर्च और कम समय में सुलभ न्याय उपलब्ध कराना तथा लंबित मामलों का त्वरित समाधान करना होता है।
रायबरेली लोक अदालत में कुल कितनी समझौता राशि रही?
जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के अनुसार राष्ट्रीय लोक अदालत में कुल समझौता राशि ₹11 करोड़ से अधिक रही।














