टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स और ASML सेमीकंडक्टर समझौता भारत के सेमीकंडक्टर निर्माण क्षेत्र के लिए एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। गुजरात के धोलेरा में विकसित हो रही सेमीकंडक्टर फैब परियोजना को तकनीकी सहयोग देने के उद्देश्य से दोनों कंपनियों के बीच समझौते पर हस्ताक्षर किए गए। केंद्र सरकार इस परियोजना को देश में हाई-टेक मैन्युफैक्चरिंग, निवेश और इलेक्ट्रॉनिक्स सप्लाई चेन को मजबूत करने की दिशा में अहम पहल मान रही है।
सेमीकंडक्टर निर्माण क्षेत्र में भारत की महत्वाकांक्षी योजनाओं को आगे बढ़ाते हुए गुजरात के धोलेरा में स्थापित हो रहे फ्रंट-एंड फैब प्रोजेक्ट के लिए टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स और डच कंपनी ASML के बीच समझौते पर हस्ताक्षर किए गए। इस दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और नीदरलैंड के प्रधानमंत्री रॉब जेटन भी मौजूद रहे। केंद्र सरकार इस परियोजना को देश के तकनीकी और औद्योगिक ढांचे के लिए महत्वपूर्ण मान रही है।
पूरा मामला क्या है
भारत पिछले कुछ वर्षों से सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम विकसित करने की दिशा में तेजी से काम कर रहा है। मोबाइल फोन, ऑटोमोबाइल, मेडिकल उपकरण, रक्षा तकनीक और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसे क्षेत्रों में चिप्स की बढ़ती मांग को देखते हुए केंद्र सरकार ने घरेलू निर्माण पर जोर बढ़ाया है।
इसी क्रम में गुजरात के धोलेरा में देश के पहले बड़े फ्रंट-एंड सेमीकंडक्टर फैब की स्थापना की प्रक्रिया चल रही है। इस परियोजना में टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स को तकनीकी सहयोग देने के लिए ASML के साथ साझेदारी की गई है। ASML दुनिया की प्रमुख कंपनियों में शामिल है, जो हाई-प्रिसिजन लिथोग्राफी मशीनें बनाती है। ये मशीनें आधुनिक माइक्रोचिप निर्माण की सबसे महत्वपूर्ण तकनीकों में गिनी जाती हैं।
धोलेरा परियोजना क्यों मानी जा रही महत्वपूर्ण
धोलेरा स्पेशल इन्वेस्टमेंट रीजन को गुजरात सरकार और केंद्र सरकार संयुक्त रूप से औद्योगिक हब के रूप में विकसित कर रहे हैं। यहां पहले से ही बड़े बुनियादी ढांचा प्रोजेक्ट, एक्सप्रेसवे और औद्योगिक कॉरिडोर पर काम चल रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि सेमीकंडक्टर फैब शुरू होने से स्थानीय स्तर पर उच्च कौशल वाले रोजगार के अवसर बढ़ सकते हैं। इसके अलावा इलेक्ट्रॉनिक्स सप्लाई चेन से जुड़े छोटे और मध्यम उद्योगों को भी अप्रत्यक्ष लाभ मिलने की संभावना है।
स्थानीय लोगों और उद्योग क्षेत्र पर असर
गुजरात में इस परियोजना को केवल एक औद्योगिक निवेश के रूप में नहीं देखा जा रहा, बल्कि इसे तकनीकी क्षेत्र में दीर्घकालिक बदलाव के रूप में माना जा रहा है। स्थानीय प्रशासन के अनुसार आने वाले वर्षों में परियोजना के आसपास आवास, परिवहन, प्रशिक्षण संस्थान और लॉजिस्टिक्स सेवाओं की मांग बढ़ सकती है।
औद्योगिक विशेषज्ञों का कहना है कि यदि परियोजना समय पर आगे बढ़ती है तो इससे भारत को आयातित चिप्स पर निर्भरता कम करने में मदद मिल सकती है। कोविड-19 महामारी और वैश्विक सप्लाई चेन संकट के दौरान चिप की कमी का असर ऑटोमोबाइल और इलेक्ट्रॉनिक्स उद्योगों पर देखा गया था।
प्रशासन और केंद्र सरकार की प्रतिक्रिया
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस समझौते को भारत के तकनीकी आत्मनिर्भरता मिशन की दिशा में अहम कदम बताया। केंद्र सरकार का कहना है कि भारत केवल उपभोक्ता बाजार नहीं, बल्कि वैश्विक तकनीकी निर्माण केंद्र के रूप में भी अपनी पहचान मजबूत करना चाहता है।
सरकारी अधिकारियों के अनुसार इस परियोजना में अंतरराष्ट्रीय तकनीकी सहयोग, घरेलू विनिर्माण क्षमता और कुशल मानव संसाधन विकास पर एक साथ काम किया जाएगा। आने वाले समय में अन्य वैश्विक कंपनियों के निवेश की संभावनाओं पर भी नजर रखी जा रही है।
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ASML कंपनी क्या काम करती है?
ASML नीदरलैंड की एक वैश्विक तकनीकी कंपनी है, जो सेमीकंडक्टर निर्माण में उपयोग होने वाली हाई-प्रिसिजन लिथोग्राफी मशीनें बनाती है।
धोलेरा सेमीकंडक्टर फैब परियोजना का उद्देश्य क्या है?
इस परियोजना का उद्देश्य भारत में आधुनिक चिप निर्माण क्षमता विकसित करना और इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र में आयात निर्भरता कम करना है।
इस समझौते से स्थानीय स्तर पर क्या असर पड़ सकता है?
परियोजना से रोजगार, औद्योगिक निवेश, लॉजिस्टिक्स और तकनीकी प्रशिक्षण से जुड़े अवसर बढ़ने की संभावना जताई जा रही है।
भारत सरकार सेमीकंडक्टर क्षेत्र में क्या कदम उठा रही है?
केंद्र सरकार सेमीकंडक्टर मिशन, PLI योजना और विदेशी तकनीकी साझेदारियों के माध्यम से घरेलू चिप निर्माण को बढ़ावा दे रही है।










