राज्यसभा सांसद एवं सामाजिक कार्यकर्ता स्वाति मालीवाल ने संसद में दवाओं की कीमतों से संबंधित एक विषय को उठाते हुए कहा कि कुछ ब्रांडेड दवाओं पर अत्यधिक ट्रेड मार्जिन दर्ज किया गया है। यह जानकारी संसद की स्थायी समिति (रसायन एवं उर्वरक) की हालिया रिपोर्ट में दर्ज तथ्यों पर आधारित है।
समिति की रिपोर्ट के अनुसार, नॉन-शेड्यूल्ड दवाओं—जो आवश्यक दवाओं की सूची में शामिल नहीं हैं—पर स्टॉकिस्ट से लेकर अधिकतम खुदरा मूल्य (MRP) तक का अंतर कई मामलों में 600% से 1100% तक पाया गया है। कुछ विशिष्ट दवाओं में यह मार्जिन 1800% तक दर्ज होने का उल्लेख भी रिपोर्ट में किया गया है।
रिपोर्ट में एक उदाहरण का हवाला देते हुए बताया गया है कि एक दवा जिसकी कीमत कंपनी द्वारा स्टॉकिस्ट को लगभग 450 रुपये रखी गई, वही दवा बाजार में 3500 रुपये तक की MRP पर उपलब्ध कराई गई। समिति ने इस अंतर को मूल्य निर्धारण में असमानता के रूप में दर्ज किया है।
समिति की रिपोर्ट में यह भी उल्लेख है कि कई मामलों में समान साल्ट और गुणवत्ता वाली दवाएं जेनेरिक रूप में 80 से 90 प्रतिशत कम कीमत पर उपलब्ध होती हैं। इसके बावजूद ब्रांडेड दवाओं की ऊँची कीमतें उपभोक्ताओं के लिए आर्थिक बोझ का कारण बनती हैं।
इस विषय पर संसद में चर्चा के बाद सार्वजनिक स्तर पर दवाओं की कीमतों में पारदर्शिता और जेनेरिक दवाओं के उपयोग को बढ़ावा देने से जुड़े मुद्दों पर संवाद तेज हुआ है। रिपोर्ट में नियामक तंत्र को मजबूत करने की आवश्यकता पर बल दिया गया है।














