अलीगढ़ की शेखा झील बनी भारत का 99वां रामसर स्थल, यूपी में बढ़कर हुई 12 साइट्स
खबर एक नजर में
| • शेखा झील भारत का 99वां रामसर स्थल घोषित |
| • उत्तर प्रदेश में अब कुल 12 रामसर साइट्स |
| • केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव ने दी जानकारी |
| • प्रवासी पक्षियों के लिए महत्वपूर्ण आवास |
| • मध्य एशियाई फ्लाईवे का अहम पड़ाव |
| • जैव विविधता, जल और जलवायु सुरक्षा को बढ़ावा |
विस्तृत खबर
केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव ने उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ स्थित शेखा झील पक्षी अभयारण्य को रामसर स्थल घोषित किए जाने की जानकारी साझा की है। इस घोषणा के साथ भारत में कुल रामसर स्थलों कीसंख्या बढ़कर 99 हो गई है, जबकि उत्तर प्रदेश में अब ऐसे स्थलों की संख्या 12 तक पहुंच गई है।
मंत्री ने अपने संदेश में कहा कि उत्तर प्रदेश ने देश को 99 रामसर स्थलों तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। उन्होंने इस उपलब्धि पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि शेखा झील का रामसर स्थल के रूप में चयन देश के आर्द्रभूमि संरक्षण प्रयासों को और मजबूत करेगा। यह कदम पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि के रूप में देखा जा रहा है।
उन्होंने बताया कि इस घोषणा से स्थानीय समुदायों की आजीविका को भी लाभ मिलेगा। इसके साथ ही जैव विविधता संरक्षण, जल संसाधन प्रबंधन और जलवायु सुरक्षा को भी बढ़ावा मिलेगा। विशेषज्ञों के अनुसार, रामसर स्थल का दर्जा मिलने से इस क्षेत्र में संरक्षण गतिविधियों को अधिक संस्थागत समर्थन मिलता है।
शेखा झील का पारिस्थितिक महत्व विशेष रूप से उल्लेखनीय है क्योंकि यह मध्य एशियाई फ्लाईवे पर स्थित है। यह फ्लाईवे एशिया के विभिन्न हिस्सों से आने वाले प्रवासी पक्षियों के लिए एक प्रमुख मार्ग है। सर्दियों के मौसम में यहां बार-हेडेड गूज, पेंटेड स्टॉर्क और कई प्रजातियों की बत्तखें बड़ी संख्या में पहुंचती हैं, जिससे यह क्षेत्र पक्षी प्रेमियों और शोधकर्ताओं के लिए भी आकर्षण का केंद्र बन जाता है।
पर्यावरण विशेषज्ञों का मानना है कि इस प्रकार के आर्द्रभूमि क्षेत्र जल संरक्षण, भूजल पुनर्भरण और पारिस्थितिक संतुलन बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। शेखा झील भी इन सभी पहलुओं में महत्वपूर्ण योगदान देती है और क्षेत्रीय पर्यावरण के लिए एक आवश्यक संसाधन के रूप में कार्य करती है।
रामसर सूची में शामिल होने से इस स्थल की अंतरराष्ट्रीय पहचान बढ़ेगी और इसके संरक्षण के लिए बेहतर प्रबंधन योजनाएं लागू की जा सकेंगी। इससे पर्यटन को भी बढ़ावा मिलने की संभावना है, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को अप्रत्यक्ष रूप से लाभ मिल सकता है।
मंत्री ने लोगों से अपील की कि वे इस महत्वपूर्ण प्राकृतिक स्थल का भ्रमण करें और इसके संरक्षण के प्रति जागरूकता फैलाने में सहयोग करें। यह पहल देश में आर्द्रभूमियों के संरक्षण और प्राकृतिक संसाधनों के सतत उपयोग के व्यापक अभियान का हिस्सा है।
उत्तर प्रदेश के 12 रामसर स्थल
| क्रम संख्या | रामसर स्थल का नाम | जिला/स्थान | घोषणा वर्ष |
|---|---|---|---|
| 1 | ऊपरी गंगा नदी (ब्रज घाट से नरौरा) | बुलंदशहर | 2005 |
| 2 | नवाबगंज पक्षी अभयारण्य (शहीद चंद्रशेखर आजाद पक्षी विहार) | उन्नाव | 2019 |
| 3 | सांडी पक्षी अभयारण्य | हरदोई | 2019 |
| 4 | समसपुर पक्षी अभयारण्य | रायबरेली | 2019 |
| 5 | समन पक्षी अभयारण्य | मैनपुरी | 2019 |
| 6 | सरसाई नावर झील | इटावा | 2019 |
| 7 | पार्वती अरगा पक्षी अभयारण्य | गोंडा | 2019 |
| 8 | सूर सरोवर (कीथम झील) | आगरा | 2020 |
| 9 | हैदरपुर आर्द्रभूमि | मुजफ्फरनगर-बिजनौर | 2021 |
| 10 | बखीरा वन्यजीव अभयारण्य | संत कबीर नगर | 2021 |
| 11 | सलिम अली पक्षी अभयारण्य | लखीमपुर खीरी | 2021 |
| 12 | शेखा झील पक्षी अभयारण्य | अलीगढ़ | 2026 |










