केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी कोलकाता-वाराणसी एक्सप्रेसवे परियोजना को बड़ा प्रशासनिक समर्थन मिला है। पर्यावरण मंत्रालय की विशेषज्ञ समिति ने ₹9250 करोड़ लागत वाले इस ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे को पर्यावरण मंजूरी देने की सिफारिश की है। प्रस्तावित सड़क पश्चिम बंगाल और उत्तर प्रदेश के बीच तेज कनेक्टिविटी स्थापित करेगी, जिससे व्यापार, माल परिवहन और यात्रा समय पर असर पड़ सकता है।
राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) की इस परियोजना के तहत लगभग 235 किलोमीटर लंबा नया एक्सप्रेसवे विकसित किया जाएगा। यह सड़क पश्चिम बंगाल के पुरुलिया, बांकुरा, पश्चिम मेदिनीपुर, हुगली और हावड़ा जिलों से होकर गुजरेगी। परियोजना का एक हिस्सा ऐसे क्षेत्र से भी होकर जाएगा जिसे वन्यजीव और बाघ आवास क्षेत्र के रूप में जाना जाता है।
विशेषज्ञ समिति की बैठक में सामने आई जानकारी के अनुसार, इस परियोजना के लिए 103 हेक्टेयर से अधिक संरक्षित और आरक्षित वन भूमि का उपयोग किया जाएगा। इसके अलावा गैर-वन क्षेत्रों में लगभग 40 हजार पेड़ों तथा वन क्षेत्र में करीब 10 हजार पेड़ों की कटाई की आवश्यकता पड़ सकती है।
एनएचएआई ने परियोजना के पर्यावरणीय प्रभाव को कम करने के लिए कई उपाय सुझाए हैं। इनमें 8 से 10 मीटर ऊंचे वन्यजीव अंडरपास, जल निकासी प्रबंधन और वृक्षारोपण कार्यक्रम शामिल हैं। अधिकारियों का कहना है कि सड़क निर्माण के साथ पारिस्थितिक संतुलन बनाए रखने का प्रयास किया जाएगा।
यह एक्सप्रेसवे पूर्वी भारत के कई औद्योगिक और कृषि क्षेत्रों को सीधे जोड़ सकता है। कोलकाता बंदरगाह से उत्तर प्रदेश और आसपास के राज्यों तक माल परिवहन की गति बढ़ने की संभावना है। वाराणसी पहले से ही राष्ट्रीय जलमार्ग और सड़क नेटवर्क का प्रमुख केंद्र बन चुका है, ऐसे में नई सड़क परियोजना लॉजिस्टिक्स क्षेत्र को अतिरिक्त समर्थन दे सकती है।
पश्चिम बंगाल के जिन जिलों से यह परियोजना गुजरेगी वहां स्थानीय स्तर पर भूमि अधिग्रहण और पर्यावरण प्रभाव को लेकर चर्चा तेज हो सकती है। वहीं व्यापारिक संगठनों का मानना है कि बेहतर सड़क नेटवर्क से निवेश और औद्योगिक गतिविधियों को गति मिलेगी।
उत्तर प्रदेश में पहले से विकसित हो रहे पूर्वांचल एक्सप्रेसवे और गंगा एक्सप्रेसवे जैसे प्रोजेक्ट्स के बाद अब यह नया मार्ग पूर्वी भारत की कनेक्टिविटी को और मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
यह भी पढ़ें: जल जीवन मिशन के तहत बंगाल को ₹2700 करोड़ मंजूर, ग्रामीण जल योजनाओं को मिलेगी रफ्तार
कोलकाता-वाराणसी एक्सप्रेसवे से किन राज्यों को फायदा होगा?
इस परियोजना से पश्चिम बंगाल और उत्तर प्रदेश के अलावा पूर्वी भारत के कई व्यापारिक क्षेत्रों को तेज सड़क संपर्क का लाभ मिल सकता है। माल परिवहन और लॉजिस्टिक्स क्षेत्र में समय की बचत होने की संभावना है।
वन्यजीवों के संरक्षण के लिए क्या कदम प्रस्तावित हैं?
एनएचएआई ने हाथियों और अन्य वन्यजीवों की सुरक्षित आवाजाही के लिए लगभग 20 अंडरपास बनाने का प्रस्ताव दिया है, ताकि सड़क निर्माण से जंगल क्षेत्र पर असर कम हो।
क्या परियोजना के लिए बड़े पैमाने पर पेड़ों की कटाई होगी?
बैठक के दस्तावेजों के अनुसार, गैर-वन क्षेत्र में लगभग 40 हजार और वन क्षेत्र में करीब 10 हजार पेड़ों की कटाई की आवश्यकता पड़ सकती है। इसके बदले पुनर्वनीकरण योजना पर भी काम किया जाएगा।











