कर्नाटक केंद्रीय विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में उपराष्ट्रपति का संबोधन, विकसित भारत के लिए युवाओं से योगदान का आह्वान

कलबुर्गी (कर्नाटक) | 22 अप्रैल 2026
दीक्षांत समारोह में उपराष्ट्रपति छात्रों को संबोधित करते हुए
कर्नाटक केंद्रीय विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में संबोधन देते उपराष्ट्रपति

खबर एक नजर में

क्रम संख्या विवरण
1 उपराष्ट्रपति ने कर्नाटक केंद्रीय विश्वविद्यालय के 10वें दीक्षांत समारोह को संबोधित किया
2 छात्रों को विकसित भारत और आत्मनिर्भर भारत निर्माण में योगदान का आह्वान
3 महिला छात्रों की बढ़ती भागीदारी और उपलब्धियों का उल्लेख
4 नवाचार, नेतृत्व और कौशल उन्नयन पर जोर दिया गया
5 सफलता को सामाजिक प्रभाव के आधार पर मापने की बात कही गई
6 आधुनिकता के साथ सांस्कृतिक विरासत से जुड़े रहने का संदेश

विस्तृत खबर

उपराष्ट्रपति ने कर्नाटक केंद्रीय विश्वविद्यालय के 10वें दीक्षांत समारोह में छात्रों को संबोधित करते हुए उन्हें जीवन के नए चरण में प्रवेश पर बधाई दी और समाज तथा राष्ट्र के प्रति जिम्मेदारी निभाने का आह्वान किया।

अपने संबोधन में उन्होंने विकसित भारत को एक साझा राष्ट्रीय मिशन बताते हुए कहा कि इसके लिए प्रत्येक नागरिक का योगदान आवश्यक है। उन्होंने युवाओं से नवाचार करने, जिम्मेदारी के साथ नेतृत्व करने और राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भागीदारी निभाने को कहा।

उपराष्ट्रपति ने आत्मनिर्भर भारत के महत्व पर भी प्रकाश डाला और कहा कि देश को आत्मनिर्भर बनाने के लिए घरेलू क्षमताओं और नवाचार को बढ़ावा देना आवश्यक है। उन्होंने छात्रों को बदलती परिस्थितियों के अनुरूप अपने कौशल को निरंतर विकसित करने की सलाह दी।

महिला सशक्तिकरण का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि शैक्षणिक उत्कृष्टता में महिलाओं की भागीदारी लगातार बढ़ रही है और यह समाज में सकारात्मक परिवर्तन का संकेत है।

उपराष्ट्रपति ने कहा कि सफलता का मूल्यांकन केवल व्यक्तिगत उपलब्धियों से नहीं, बल्कि समाज पर पड़ने वाले सकारात्मक प्रभाव से किया जाना चाहिए।

उन्होंने छात्रों को आधुनिकता को अपनाने के साथ-साथ भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत से जुड़े रहने का संदेश दिया।

इस अवसर पर राज्यपाल, कुलपति, संकाय सदस्य और बड़ी संख्या में छात्र एवं अभिभावक उपस्थित रहे।

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