किसानों के लिए बड़ी खबर: अच्छी बीज, KCC और नई तकनीक पर सरकार का जोर
केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय द्वारा उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में आयोजित उत्तर क्षेत्र कृषि सम्मेलन में कृषि विकास के लिए नई कार्ययोजना और क्षेत्रीय रणनीति पर व्यापक चर्चा की गई। सम्मेलन में केंद्रीय कृषि मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान और मुख्यमंत्री श्री योगी आदित्यनाथ सहित कई राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के प्रतिनिधि शामिल हुए।
केंद्रीय मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि भारत जैसे विशाल देश में एक समान नीति से कृषि की सभी समस्याओं का समाधान संभव नहीं है। उन्होंने जोनल कॉन्फ्रेंस की अवधारणा को आवश्यक बताते हुए कहा कि अलग-अलग क्षेत्रों की जलवायु, मिट्टी और फसल प्रणाली के अनुसार रणनीति बनाना अधिक प्रभावी होगा।
उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश वर्तमान में देश में खाद्यान्न उत्पादन में अग्रणी है और इसमें किसानों की महत्वपूर्ण भूमिका है। साथ ही पंजाब और हरियाणा जैसे राज्यों की हरित क्रांति में भूमिका तथा हिमालयी राज्यों की बागवानी क्षमता का भी उल्लेख किया गया।
केंद्रीय मंत्री ने उर्वरकों के बढ़ते उपयोग पर चिंता व्यक्त करते हुए संतुलित उर्वरक उपयोग, प्राकृतिक खेती और मिट्टी के स्वास्थ्य संरक्षण पर जोर दिया। उन्होंने नकली खाद, बीज और कीटनाशकों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की आवश्यकता भी बताई।
श्री चौहान ने किसान आईडी और किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) को किसानों तक पहुंचाने को प्राथमिकता देने की बात कही, जिससे ऋण और सरकारी योजनाओं तक पहुंच आसान हो सके। उन्होंने कृषि वैज्ञानिकों को गांव स्तर तक जोड़ने के लिए विकसित कृषि संकल्प अभियान को आगे बढ़ाने की अपील की।
मुख्यमंत्री श्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि कृषि में वास्तविक परिवर्तन तभी संभव है जब प्रयोगशालाओं का ज्ञान सीधे खेत तक पहुंचे। उन्होंने तकनीक, प्रशिक्षण और वैल्यू एडिशन को खेती की प्रगति के लिए आवश्यक बताया।
मुख्यमंत्री ने बताया कि उत्तर प्रदेश में कृषि विज्ञान केंद्रों की सक्रियता बढ़ने से किसानों तक नई तकनीक और जानकारी तेजी से पहुंच रही है। उन्होंने यह भी कहा कि राज्य में अब बहु-फसली प्रणाली को अपनाने से किसानों की आय में सुधार हुआ है।
सम्मेलन में खरीफ और रबी सीजन की तैयारी, कृषि विविधीकरण, फूड प्रोसेसिंग और बाजार से जुड़ाव जैसे मुद्दों पर साझा एजेंडा तैयार किया गया। इसमें विभिन्न राज्यों के मंत्री, वैज्ञानिक, अधिकारी और प्रगतिशील किसान शामिल हुए।











