केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने बुद्ध पूर्णिमा के अवसर पर लद्दाख के लेह में पवित्र अवशेषों की प्रदर्शनी, सांस्कृतिक समारोह और डेयरी क्षेत्र से जुड़े महत्वपूर्ण समझौते में भाग लिया। इस कार्यक्रम का असर न केवल धार्मिक पर्यटन पर बल्कि स्थानीय किसानों, सहकारी संस्थाओं और अर्थव्यवस्था पर भी पड़ने की उम्मीद है।
जिवेत्सल, लेह में आयोजित इस कार्यक्रम में भगवान गौतम बुद्ध की पवित्र शरीर धातु (Relics) की प्रदर्शनी का उद्घाटन किया गया। यह प्रदर्शनी संस्कृति मंत्रालय के सहयोग से International Buddhist Confederation, CIBS, लद्दाख गोंपा एसोसिएशन और लद्दाख बौद्ध एसोसिएशन द्वारा आयोजित की गई है। आम जनता के लिए यह प्रदर्शनी 2 से 14 मई 2026 तक खुली रहेगी।
इस अवसर पर पारंपरिक बौद्ध सांस्कृतिक प्रस्तुतियां भी आयोजित की गईं, जिन्होंने क्षेत्र की समृद्ध विरासत को प्रदर्शित किया। यह आयोजन न केवल आध्यात्मिक महत्व रखता है बल्कि पर्यटन को बढ़ावा देने का भी एक महत्वपूर्ण माध्यम बन रहा है। स्थानीय प्रशासन के अनुसार, इस तरह के आयोजनों से देश-विदेश से आने वाले पर्यटकों की संख्या में वृद्धि होती है।
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कार्यक्रम के दौरान डेयरी सेक्टर को सशक्त करने की दिशा में भी बड़ा कदम उठाया गया। Mother Dairy और लद्दाख मिल्क फेडरेशन के बीच एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए, जिसका उद्देश्य डेयरी उत्पादों के बेहतर विपणन और उच्च गुणवत्ता वाले खाद्य उत्पादों की निरंतर आपूर्ति सुनिश्चित करना है।
इसके साथ ही पहले घोषित डेयरी परियोजनाओं—जैसे दूध प्रसंस्करण इकाइयों, मिल्क कूलिंग सिस्टम और ऑटोमेटेड मिल्क कलेक्शन सिस्टम (AMCS)—को भी आगे बढ़ाने की दिशा में कार्य किया जा रहा है। इससे किसानों को पारदर्शी भुगतान, बेहतर कीमत और तकनीकी सहायता मिलने की उम्मीद है।
यह मॉडल उन सभी जिलों के लिए भी उपयोगी हो सकता है, जहां डेयरी गतिविधियां तो हैं लेकिन डिजिटल सिस्टम और कोल्ड-चेन का विस्तार अभी भी सीमित है। ऐसे में लद्दाख का यह प्रयोग अन्य राज्यों के लिए एक उदाहरण बन सकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह पहल “सहकार से समृद्धि” के दृष्टिकोण को मजबूत करते हुए ग्रामीण रोजगार, महिला समूहों की भागीदारी और स्थानीय बाजार को गति दे सकती है। साथ ही, बुद्ध पूर्णिमा जैसे धार्मिक आयोजनों से सांस्कृतिक कूटनीति और अंतरराष्ट्रीय संबंधों को भी मजबूती मिलती है।
लद्दाख में आयोजित इस प्रदर्शनी का धार्मिक और सामाजिक महत्व क्या है?
यह प्रदर्शनी भगवान बुद्ध के पवित्र अवशेषों से जुड़ी होने के कारण अत्यंत धार्मिक महत्व रखती है और साथ ही यह शांति, करुणा और सह-अस्तित्व का संदेश भी देती है, जिससे सामाजिक सद्भाव को बढ़ावा मिलता है।
डेयरी MoU से स्थानीय किसानों को क्या फायदा होगा?
इस समझौते से किसानों को अपने उत्पादों के लिए बेहतर बाजार, स्थिर कीमत और गुणवत्ता सुधार की सुविधा मिलेगी, जिससे उनकी आय बढ़ने की संभावना है।
क्या इस तरह के आयोजन पर्यटन को बढ़ावा देते हैं?
हाँ, ऐसे धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजन देश-विदेश के पर्यटकों को आकर्षित करते हैं, जिससे स्थानीय व्यापार, होटल और परिवहन क्षेत्र को आर्थिक लाभ मिलता है।















