मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में उत्तर प्रदेश में पारिवारिक सदस्यों के बीच अचल संपत्ति के दान से जुड़े नियमों में महत्वपूर्ण बदलाव को मंजूरी दी गई है। इस फैसले के तहत स्टाम्प शुल्क में दी जा रही छूट के दायरे को और व्यापक किया गया है।
अब तक यह सुविधा केवल कृषि भूमि और आवासीय संपत्तियों तक सीमित थी, लेकिन नए निर्णय के बाद यह छूट व्यावसायिक और औद्योगिक संपत्तियों पर भी लागू होगी। इसमें दुकान, फैक्ट्री, गोदाम जैसी संपत्तियां शामिल हैं।
पहले कमर्शियल और इंडस्ट्रियल संपत्तियों के दान पर शहरों में लगभग 7 प्रतिशत और ग्रामीण क्षेत्रों में 5 प्रतिशत तक स्टाम्प शुल्क देना पड़ता था। इससे संपत्ति की कीमत अधिक होने पर स्टाम्प शुल्क की राशि लाखों रुपये तक पहुंच जाती थी।
कैबिनेट के इस फैसले के बाद अब पारिवारिक सदस्यों के बीच दान विलेख निष्पादित करने पर स्टाम्प शुल्क अधिकतम ₹5000 ही लिया जाएगा, चाहे संपत्ति की कीमत कितनी भी हो। यह व्यवस्था पूरे राज्य में समान रूप से लागू होगी।
हालांकि, संपत्ति पंजीकरण से संबंधित रजिस्ट्रेशन शुल्क अलग से देय होगा, जो नियमानुसार लागू रहेगा। सरकार का मानना है कि इस फैसले से पारिवारिक संपत्ति के कानूनी हस्तांतरण की प्रक्रिया सरल होगी और संपत्ति विवादों में कमी आएगी।
यह निर्णय व्यापारियों, उद्योगपतियों और आम परिवारों के लिए राहत भरा माना जा रहा है, क्योंकि अब संपत्ति का दान कानूनी रूप से कम खर्च में किया जा सकेगा।
यह व्यवस्था संबंधित अधिसूचना के राजपत्र (गजट) में प्रकाशन के बाद लागू होगी।






