आईएनएस सुदर्शिनी मोरक्को के कैसाब्लांका पहुँचा, भारत की समुद्री कूटनीति को मिला नया आयाम

नई दिल्ली | 16 अप्रैल 2026
INS Sudarshini Indian Navy training ship at Casablanca port Morocco with Indian and Moroccan flags
कैसाब्लांका बंदरगाह पर आईएनएस सुदर्शिनी का काल्पनिक दृश्य (प्रतिनिधि चित्र)

भारतीय नौसेना का नौकायन प्रशिक्षण पोत आईएनएस सुदर्शिनी 15 अप्रैल 2026 को मोरक्को के प्रमुख बंदरगाह कैसाब्लांका पहुँचा। यह यात्रा ‘लोकायन 26’ महासागरीय मिशन का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य वैश्विक समुद्री संपर्क, प्रशिक्षण और कूटनीतिक सहयोग को मजबूत करना है।

इस मिशन का संचालन भारत की ‘महासागर (MAHASAGAR) परिकल्पना’ के अनुरूप किया जा रहा है, जिसका पूर्ण रूप है Mutual and Holistic Advancement for Security and Growth Across Regions। इसका लक्ष्य क्षेत्रीय सुरक्षा, सहयोग और सतत विकास को बढ़ावा देना है, जो UPSC और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए महत्वपूर्ण अवधारणा है।

कैसाब्लांका पहुँचने पर जहाज के कमांडिंग ऑफिसर ने मोरक्को नौसेना के सेंट्रल मैरीटाइम सेक्टर के कमांडर कमोडोर हसन अकुली और रॉयल नेवल स्कूल के निदेशक कमोडोर उमर नासरी से शिष्टाचार भेंट की। इस दौरान दोनों देशों के बीच नौसैनिक प्रशिक्षण, समुद्री सहयोग और क्षमता निर्माण पर चर्चा हुई।

यह यात्रा भारत और मोरक्को के बीच समुद्री सहयोग, रक्षा कूटनीति और प्रशिक्षण आदान-प्रदान को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

तीन दिवसीय इस दौरे के दौरान आईएनएस सुदर्शिनी का चालक दल रॉयल मोरक्कन नौसेना के कर्मियों के साथ संवाद करेगा, जहाज पर अतिथियों की मेजबानी करेगा तथा सांस्कृतिक और पेशेवर गतिविधियों में भाग लेगा। यह पहल नौसैनिक कूटनीति (Naval Diplomacy) का एक प्रमुख उदाहरण मानी जाती है।

पिछले एक वर्ष में भारतीय नौसेना के चार प्रमुख जहाज—आईएनएस तबर, आईएनएस तरकश, आईएनएस सुमेधा और आईएनएस तुशील—भी कैसाब्लांका का दौरा कर चुके हैं। इससे दोनों देशों के बीच इंटरऑपरेबिलिटी (परस्पर संचालन क्षमता) और विश्वास में वृद्धि हुई है।

इसके अतिरिक्त, नवंबर 2025 में रॉयल मोरक्कन नेवी के इंस्पेक्टर रियर एडमिरल मोहम्मद ताहिन ने भारत के दक्षिणी नौसेना कमान का दौरा किया था, जो द्विपक्षीय रक्षा संबंधों को सुदृढ़ करने का संकेत देता है।

आईएनएस सुदर्शिनी अपनी यात्रा के दौरान ऐतिहासिक समुद्री मार्गों और अंतरराष्ट्रीय समुद्री गलियारों से गुजरते हुए ‘वसुधैव कुटुम्बकम्’ की भावना को बढ़ावा दे रहा है। यह भारत की बढ़ती ब्लू वॉटर नेवी क्षमता और वैश्विक समुद्री उपस्थिति को भी दर्शाता है।

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