पनकी-जवाहरपुर परियोजनाओं के निजीकरण पर विरोध तेज, बिजली कर्मचारियों ने जताई रोजगार को लेकर चिंता
खबर एक नजर में
| क्रम संख्या | विवरण |
|---|---|
| 1 | पनकी और जवाहरपुर ताप विद्युत परियोजनाओं को निजी कंपनियों को देने के प्रस्ताव का विरोध |
| 2 | बिजली कर्मचारियों ने निर्णय को वापस लेने की मांग उठाई |
| 3 | करीब 2000 से अधिक कर्मचारियों के रोजगार पर प्रभाव की आशंका |
| 4 | संघर्ष समिति ने इसे निजीकरण की दिशा में कदम बताया |
| 5 | प्रदेशभर में जन-जागरण अभियान और विरोध सभाएं जारी |
| 6 | निर्णय वापस न होने पर आंदोलन तेज करने की चेतावनी |
विस्तृत खबर
उत्तर प्रदेश में बिजली क्षेत्र से जुड़े कर्मचारियों के बीच असंतोष उस समय बढ़ गया, जब पनकी और जवाहरपुर ताप विद्युत परियोजनाओं के संचालन और अनुरक्षण को निजी कंपनियों को सौंपे जाने का प्रस्ताव सामने आया। विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति ने इस निर्णय पर आपत्ति जताते हुए इसे वापस लेने की मांग की है।
समिति के अनुसार, दोनों परियोजनाओं में बड़ी संख्या में नियमित और संविदा कर्मचारी कार्यरत हैं। प्रस्तावित व्यवस्था लागू होने पर कर्मचारियों की सेवाओं पर प्रभाव पड़ने की संभावना जताई गई है।
संघर्ष समिति ने कहा कि यह कदम निजीकरण की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के रूप में देखा जा रहा है। कर्मचारियों के अनुसार, इससे सार्वजनिक क्षेत्र की भूमिका प्रभावित हो सकती है।
समिति ने यह भी बताया कि कर्मचारियों के बीच दबाव और उत्पीड़न से संबंधित मुद्दों को लेकर चिंता जताई गई है और पूर्व में की गई कार्यवाहियों को वापस लेने की मांग की गई है।
प्रदेश के विभिन्न जिलों में प्रदर्शन और जन-जागरण अभियान जारी है। संभल और रामपुर में हाल ही में सभाएं आयोजित की गईं, जबकि अन्य जिलों में भी कार्यक्रम जारी हैं।
संघर्ष समिति ने संकेत दिया है कि यदि निर्णयों में बदलाव नहीं किया गया, तो आंदोलन को और व्यापक किया जा सकता है।








